बैरिया। एक बार फिर गंगा तबाही मचाने के लिए मचलने लगीं हैं। लगातार हो रही बारिश के चलते रविवार की सुबह गंगा के जलस्तर में बढ़ाव दर्ज किया गया। गंगा की उफनती लहरों में रविवार को केहरपुर स्थित हरेराम बह्मचारी का आश्रम विलीन हो गया। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार रविवार दोपहर एक बजे 58.920 मी. दर्ज किया गया। यहां पर खतरा बिंदु 57.615 मी. है। नदी अभी भी खतरा बिंदु से 1.305 मी. ऊपर बह रही है जबकि प्रति घंटे दो सेमी बढ रही है।
गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के साथ ही कटान भी तेज हो गया। केहरपुर में हरेराम ब्रह्मचारी का आश्रम विलीन होते ही गांव में खलबली मच गई। बताया जाता है कि पांच दिनों से हो रही बारिश के चलते बलिया से लेकर इलाहाबाद तक गंगा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों में दहशत है।
बारिश से बाढ़ पीडि़तों की बढ़ी दुश्वारियां
रामगढ़। गंगा के जलस्तर में बढ़ाव व पांच दिनों से हो रही लगातार बारिश ने बाढ़ पीडि़तों की मुसीबतों को दोगुना कर दिया है। किसी तरह प्लास्टिक के टुकड़ों में अपने कुनबे में मासूमों के साथ जीवन यापन करने वाले बाढ़ पीडि़त अब बेवस व लाचार हो गए हैं। तिरपाल में बच्चे दो जून के रोटी के लिए बिलबिलाते नजर आ रहे हैं तो वही विषैले जंतुओं का भय भी लोगों में बना हुआ है।
इन दिनों कोई रहनुमा अगर भोजन उपलब्ध न कराए तो उस वक्त मासूमों को खाली पेट ही सोना पड़ रहा है। लगातार बारिश के चलते रामगढ़ से लेकर जयप्रकाश नगर तक एनएच 31 के पटरी पर बसे लोगों की हालत देखने से ही पता चल जा रहा है कि आखिर किस तरह से यह बाढ़ पीडि़त अपनी दुश्वारियां झेल रहे हैं। पीडि़तों की मानें तो जहां गंगा के जलस्तर कम होने लगा था तो ऐसा लगा कि कुछ दिनों में राहत नसीब हो जाएगी लेकिन एक बार फिर गंगा नदी में बढ़ाव शुरू हो गया है जिसके चलते उनके माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं।
एसडीएम ने कटान पीडि़तों को बांटी राहत
रामगढ़। लगातार हो रही बारिश के बीच सदर एसडीएम अश्वनी कुमार श्रीवास्तव ने रविवार को सदर तहसील के ग्राम सभा गंगापुर के रामगढ़ क्षेत्र के अवशेष चौबे छपरा व सोनार टोला के बाढ़ पीडि़तों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया। एसडीएम ने गंगा की कटान में विलीन हुए आशियानों के पीडि़तों को शीघ्र ही अनुदान मुहैया कराने का भरोसा दिया।
एसडीएम ने चौबेछपरा अवशेष, बनिया टोला, सोनार टोला रामगढ़ के साथ ही मझौवा मठिया समेत कुल 167 पीडि़तों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया। इस मौके पर चौकी प्रभारी पंकज सिंह, गंगापुर के ग्राम प्रधान श्याम कैलाश साह, लेखपाल लक्ष्मण सिंह, अवधेश कुमार राम, गुप्तेश्वर नाथ वर्मा, अजय चौबे, दिनेश सिंह आदि रहे।
बाढ़ से बर्बाद किसानों की बढ़ी चिंताएं
बैरिया। उफनाई गंगा व घाघरा का जलस्तर उतार पर होने के बाद गंगा नदी के बैकरोल होने के कारण घाघरा नदी चांदपुर में दो सेमी व मांझी में पांच सेमी बढ़ाव पर है। बाढ़ विभाग की मानें तो जैसे ही वर्षा समाप्त होगी नदी घटाव हो जायेगी। उधर, बाढ़ पीडि़त गृहस्थी उजड़ने से चिंता में डूबे हैं। तिनका-तिनका चुनकर सहेजी गृहस्थी बाढ़ में बर्बाद होने और दिन रात मेहनत कर उगाई गई फसलों के तहस नहस होने का दर्द उनके चेहरे पर झलक रहा है। बैरिया तहसील के दुबेछपरा, गोपालपुर, प्रसाद छपरा, बुधनचक, पांडेयपुर अठगावां के अलावा गंगा उसपार नौरंगा गांव के लोग गृहस्थी का सामान नष्ट होने सकते में हैं।
किसानों की फसलें भी बर्बाद हो चुकी हैं। किसानों का कहना है कि अबकी मक्का, परवल आदि की फसलें अच्छी हुईं थीं। सोचा था कि अच्छी पैदावार होगी तो बिटिया के हाथ पीले कर देंगे, लेकिन इस आपदा ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। लोगों का कहना है कि अब तो बिखरी गृहस्थी सहेज कर किसी तरह काम चला रहे हैं।
सरकार अगर मुआवजा दे तो कुछ राहत मिल सकती है। गोपालपुर गांव के राजकिशोर उपाध्याय ने बताया कि बाढ़ से उनका पूरा मकान गिर गया, उनके पास थोड़ा बहुत खेत है, पूरी मक्का की फसल नष्ट हो गई। शैलेन्द्र पासवान ने कहा घर में विवाह योग्य दो लड़कियां हैं। सोचा था कि अबकी साल में एक लड़की का ब्याह कर देंगे, अब ऐसे में वह अपनी बेटी के कैसे हाथ पीले कर पाएंगे, यही चिंता खाए जा रही है।
इसी तरह गांव के सचिन सिंह की छह बीघा, अमित दुबे की चार बीघा और रामाकान्त पाण्डेय की चार बीघा मक्का की फसल नष्ट हो गई है। उनका कहना है कि बड़ी मेहनत से मकान बनाया और गृहस्थी का सामान जुटाया। सब बर्बाद हो गया।अब तो सिर छिपाने की समस्या खड़ी हो गई है। नौरंगा प्रधान प्रतिनिधि सुरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि हमारे गांव के दर्जनों लोगों का 50 एकड़ से अधिक परवल का फसल नदी में विलीन हो गया है और करीब 200 एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में समाहित हो चुका है।
विधायक का लंगर बना सहारा
बैरिया। बाढ़ पीडि़तों को भोजन कराने के लिए विधायक सुरेंद्र सिंह द्वारा दुबेछपरा में आयोजित लंगर लगातार 17वें दिन भी जारी रहने से इस बरसात के मौसम में बाढ़ पीडि़तों के लिए बहुत बड़ा सहारा बना हुआ है। मूसलाधार बारिश के बीच न तो स्वयं सेवी संस्थाएं भोजन का पैकेट लेकर आ रही है, न ही राजनैतिक दल के लोग बरसात के कारण बाढ़ पीडि़त खाना भी नहीं पका सकते हैं। ऐसे में यह लंगर ही बाढ़ पीडि़तों की क्षुधा तृप्ति का एकमात्र साधन बना हुआ है। स्वयं विधायक अपनी उपस्थिति में बाढ़ पीडि़तों को भोजन कराते हैं।
लगातार भोजन परोसते भी उन्हें लोग देख रहे हैं। लोगों का कहना है कि बाढ़ कई बार यहां आई है, दो बार पहले भी सन 2013 व 2016 में रिंग बंधा कटने के कारण स्थिति इसी तरह से भयावह हुई थी। तब कोई भी जनप्रतिनिधि लंगर का आयोजन कर बाढ़ पीडि़तों को भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास नहीं किया था। लंगर में रोजाना तीन से चार हजार बाढ़ पीडि़तों को भोजन मिलता है। विधायक ने कहा कि जब तक बाढ़ रहेगी, बाढ़ पीडि़तों को लंगर में भोजन मिलता रहेगा।