लाल निशान के करीब पहुंचते ही गंगा का खौफनाक मंजर दिखने लगा है। जिसके चलते एक तरफ जहां डेंजर जोन पचरूखिया पर बने स्परों में धारा की बैकरोलिंग का दबाव बढ़ता जा रहा है, वहीं एनएच-31 की भी मुश्किलें बढ़ती जा रही है। पानी निचले इलाके में फैल जाने के कारण रातोंरात मझौंवा, प्रमोद पुर दियरी, गायघाट में बोई गई खड़ी फसल जलमग्न हो गई हैै।
शनिवार की शाम चार बजे गंगा लाल निशान से आधा मीटर नीचे बह रही है। चौबे छपरा में उजाड़ खंड के बाद खाली बची जमीन भी घिरनी शुरू हो गई है। मगर कोई भी शासन-प्रशासन या क्षेत्रीय लेखपाल भी इन इलाकों का जायजा लेने नहीं पहुंच रहे हैं। वहीं गंगा की धारा अब दूबे छपरा रिंग बंधा की तरफ घूम गई है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार शनिवार की शाम गंगा का जलस्तर 57.10 मीटर दर्ज की गई। जो लालनिशान से मात्र .40 सेमी ही दूर है। यहां खतरे बिंदू 57.50 मीटी है। गंगा प्रति घंटा दो सेमी का बढ़ाव नदी में बना हुआ है।