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Ballia News: बदहाल पड़े हैं अंत्येष्टि स्थल, बारिश के वक्त होगी दिक्कत

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ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए दूर के घाटों तक न जाना पड़े। इसलिए सरकार ने मुक्तिधाम नाम से करीब 40 गांवों में अंत्येष्टि स्थल बनवाया है। कुछ जगहों पर गांव के लोग कब्जा कर उसे निजी प्रयोग में ला रहे हैं। बारिश के दिनों में घाटों के हालात खराब होंगे तो यहां अंत्येष्टि करना भी मुश्किल होगा।जिले के ज्यादातर लोग गंगा घाट पर अंत्येष्टि करने के लिए पहुंचते हैं। वहीं, बांसडीह तहसील के लोग घाघरा नदी के घाटों पर पर पहुंचते हैं। लोगों को परेशानी न हो, इसको लेकर सरकार ने वर्ष 2014-15 में मोक्षधाम योजना चालू की थी।
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इस योजना के तहत लोगों की सुविधाओं को देखते हुए बड़ी पंचायतों में जगह के अनुसार अंत्येष्टि स्थल बनाए गए। यहां पर शव जलाने, लोगों के बैठने के साथ ही छाया के लिए शेड, पक्के चबूतरे व पानी आदि की व्यवस्था की गई। मगर जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।
नहीं जला एक भी शव : सुखपुरा में बना मुक्तीधाम में अभी तक एक भी शव नहीं जलाया गया। करीब तेरह लाख से बने इस मुक्तीधाम पर जाने का कोई रास्ता भी नहीं बना हैं।
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जिले के 22 अंत्येष्टि स्थलों में से ज्यादातर दुर्दशा के शिकार हैं। कहीं, हैंडपंप खराब हो गए हैं तो कहीं शेड टूट गए हैं। जो बचे हैं, उनमें से कई पर अवैध कब्जे हैं। बारिश में गंगा व घाघरा घाट तक पानी पहुंचेगा तो इन स्थलों की जरूरत महसूस होगी। यही हालात रहे तो लोग यहां आने से भी कतराएंगे।
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केस- 1
बांसडीह। नगर पंचायत, बांसडीह के वार्ड नंबर 15 में वार्ड वर्ष 2016-17में 15 लाख 88 हजार की पहली किस्त से मुक्ति धाम का निर्माण कराया गया। लेकिन यहां न ही पीने के लिए पेयजल की व्यवस्था है और न ही बिजली की व्यवस्था। जबकि शासन द्वारा मुक्ति धाम में शौचालय, पानी व बिजली की भी व्यवस्था करना अनिवार्य है, जो धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है। मुक्तिधाम पर जाने वाली सड़क भी जर्जर हैं।

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केस-2
नरहीं। भरौली में गंगा नदी पर वीर कुंवर सिंह सेतु के नीचे दाहिने तरफ शवदाह गृह बनाया गया, जिसका कोई उपयोग नहीं है। इलाके के अधिकांश लोग शव के अंतिम संस्कार के लिए भरौली गंगा तट पर ही जाते हैं, जहां लोगों को बैठने तथा पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। गर्मी के दिनों में लोग धूप में ही घाटों पर बैठे रहते हैं। दोहरीघाट पर बने मुक्तिधाम की तर्ज पर भरौली गंगा तट पर भी शवदाह बनाने की पहल शुरू हुई , लेकिन भूमि के अभाव में यह पूरा नहीं हुआ।

केस-3
बेल्थरारोड। सरयू नदी के तट पर अंत्येष्टि स्थल बनाए गए हैं, लेकिन माकूल सुविधाएं नहीं हैं। गुलौरा मठिया स्थित अंत्येष्टि स्थल पर जाने के लिए मार्ग का निर्माण कराया गया, लेकिन प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं है। तुर्तीपार के अंत्येष्टि स्थल पर पहुंचने वाला मार्ग जर्जर हो गया है। लेकिन लाइट की व्यवस्था नहीं है।

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केस-4
रतसर। नगर के मरियम सेवाश्रम के पूरब रतसर भटवलिया मार्ग पर दशक पूर्व विधायक निधि से बना अंत्येष्टि स्थल बदहाल है। यहां अंत्येष्टि के लिए आने वाले लोगों को ठहराव देने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए लगा सरकारी नल भी खराब हालत में है।
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अब तक नहीं बना अंत्येष्टि स्थल
पूर। पंदह ब्लाक अंतर्गत एकइल गांव में अंत्येष्टि स्थल का निर्माण अब तक नहीं हुआ। ग्राम प्रधान संजना सिंह की माने तो कार्य योजना शासन को भेजी गई थी लेकिन कोई पहल नहीं हुई। आज भी खुले में ही शवों को जलाया जाता है। वहीं, एकल गांव निवासी बृजेश सिंह का कहना है कि अगर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण हो जाता है तो काफी सहूलियत होगी। वही, राज मोहन सिंह का कहना है कि गर्मी के दिनों में या बरसात के दिनों में शवदाह को लेकर बड़ी समस्या होती है।


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छह और बनाए जाने हैं अंत्येष्टि स्थल
जिला पंचायत राज अधिकारी यतेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में छह नए अंत्येष्टि स्थल बनाए जाने हैं। इसके तहत चार का निर्माण आरंभ हो चुका है। दो अन्य का निर्माण शुरू होना है।
लाखों की लागत से बना शवदाह गृह काम नहीं आ रहा
जयप्रकाश नगर। वित्तीय वर्ष 2014-15 में विकास खंड मुरली छपरा की ग्राम पंचायत चांददीयर के सरयू नदी के तट पर निर्मित शवदाह गृह में घास फूस उग आए हैं। आज तक एक भी शव की अंत्येष्टि यहां नहीं हुई। इसका उद् घाटन तत्कालीन विधायक जयप्रकाश अंचल ने 25 मई 2015 को किया था।

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एक अंत्येष्टि स्थल के लिए 23.46 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। सभी में तेजी से काम कराया जा रहा है।अंत्येष्टि स्थलों का निरीक्षण कर हकीकत परखी जाएगी। खामियों को दूर किया जाएगा। यदि कहीं पर अवैध कब्जा मिलता हैं तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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- यतेंद्र सिंह, डीपीआरओ -

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