बैरिया। एक हिंदी फिल्म में कलाकारों ने मजदूर की भूमिका में गीत फिल्माया था कि हम मेहनतकश इस दुनियां से जब अपना हिस्सा मांगेंगे, दौलत की अंधेरी रातों से हम अपना सवेरा मांगेंगे। आज एक बार फिर यही स्थिति सामने आ रही है। शहरों से पलायन करने वालों में ऐसे भी मजदूर हैं जो गैर प्रान्त से पैदल ही अपने गांव की ओर चल दिए हैं, सैकड़ो किमी सफर के बावजूद इनका हौसला सातवें आसमान पर है।
लॉकडाउन के कारण मुम्बई, गुजरात, कोलकाता, असम, पंजाब में कम्पनियां बन्द हो गईं और अपने ही मजदूरों को खोराकी के पैसे देने के लिए कम्पनी के मैनेजर ने भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद विवश मजदूर पास रखे कुछ समानों को बेच दिया और पीठ पर बैग, सिर पर गठरी रखकर पैदल ही हजारों किमी की दूरी को पैदल ही माप दिया। हौसला इस कदर कि धूप में भी मजदूरों के पांव चलने से नहीं रुके। इस सफर में उनके मन मे हौसला बढ़ता गया कि शहर में जितना मेहनत करते हैं उतना मेहनत गांव पर ही करके एक इतिहास बनाएंगे। मुम्बई से पैदल चल कर समस्तीपुर जाने वाले आलोक सिंह ने बताया जिस शहर ने हमें कोरोना महामारी के समय अकेले जूझने के लिए छोड़ दिया, कम्पनी के मालिक ने एक ही झटके में हमारी दिन रात की मेहनत को भुला दिया और हमें भूखे मरने के लिए छोड़ दिया, अब अगर हम सारे मजदूर ठान लें कि कतई नही जाएंगे तो मेहनत के बल पर अपने ही गांव में इतिहास लिखेंगे। अहमदाबाद से हाजीपुर जाने वाले मजदूर अजीत पटेल ने कहा आज भले ही कम्पनी के मालिकों ने दौलत की अंधेरी रातों में हमे भुला दिया लेकिन इन अंधेरी रातों से हम अपना सवेरा मांगेंगे। एक दिन ऐसा भी वक्त आएगा कि कम्पनियां हमें ढूंढेगी और हम अपने गांव छोड़कर जाने से इंकार कर देंगे। मजफ्फरपुर निवासी राजेश महतों ने बताया कि हमारे दादाजी कहते थे शहर में परिवार मत ले जा, वहां से अधिक से अधिक पैसे कमाकर घर भेजो, पैसे पास रहेंगे तो एक दिन काम आएगा। लेकिन हम लोग अंधे हो गए थे सोचा गांव से अच्छा शहर है, हमने शहर में अपने बच्चों को ढालना शुरू कर दिया था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा हम जितना शहर में मेहनत करते हैं गांव में ही मेहनत करेंगे। उसी गांव के मोहन ने बताया कि हम जितने मजदूर आफत के समय शहर छोड़कर गांव पहुंच रहे हैं अगर फिर शहर जाने से इंकार कर दिए तब कम्पनी मालिकों को हमारी मेहनत समझ में आएगी। हम गांव पर खेती, पशुपीाछलन व अन्य व्यवसाय करेंगे।
हर टोला व मोहल्ले में पहुंच रहे प्रवासी मजदूर
लालगंज। देश के विभिन्न शहरों से मजदूरों के अपने गांव घर लौटने का सिलसिला जारी है । बीते दस दिनों के अंदर कोई टोला मोहल्ला ऐसा नहीं है जहां बाहर से युवक नहीं आए हों। कोई क्वारंटीन सेंटर पर रह रहा है तो कोई होम क्वारंटीन के तहत घरों में। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 3500 आबादी वाले ग्राम पंचायत हृदयपुर में सौ से ज्यादा मजदूर अपने गांव लौटे हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हृदयपुर अजय राम की मानें तो 114 लोग बाहर से केवल हृदयपुर में सोमवार तक आ गए हैं जिसमें 16मुरार पट्टी माजरा हृदयपुर पर क्वारंटीन हैं और शेष लोग अपने अपने घरों में होम क्वारंटीन हैं। उधर, बाहर से आने वाले मजदूरों की संख्या से आम लोग सहमे हुए हैं।