फेफना क्षेत्रके वायना गांव के समीप निर्माणाधीन पानी टंकी। संवाद
बलिया। भूगर्भ जल में घुले आर्सेनिक के धीमे जहर से निजात दिलाने की दिशा में जिले में चल रहीं सतही जल परियोजनाएं अब तेजी से आकार लेने लगी हैं। गंगा और सरयू नदी के पानी को शोधित कर घर-घर पहुंचाने के लिए करीब 3400 करोड़ रुपये से तीन बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें बेलहरी और मनियर की परियोजनाओं से मार्च 2027 तक पानी की आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। गंगा नदी पर आधारित बेलहरी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि सरयू नदी के पानी को शोधित करने के लिए मनियर में बन रही परियोजना का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। मनियर परियोजना के तहत जिले में करीब 450 पानी की टंकियां तैयार हो चुकी हैं। बाढ़ के बाद निर्माण कार्य में और तेजी आने की उम्मीद है।
दरअसल, जिले की करीब एक-तिहाई आबादी को आर्सेनिक प्रभावित भूगर्भ जल से राहत देने के लिए सरकार ने सरफेस वाटर योजना को मंजूरी दी है।
इसके तहत नदियों के पानी को आधुनिक तकनीक से शोधित कर पाइपलाइन के माध्यम से गांवों में पहुंचाया जाएगा। हालांकि बजट के अभाव में मार्च से पहले कुछ समय के लिए निर्माण कार्य प्रभावित हुआ था। अब शासन से कार्यदायी संस्थाओं को धनराशि जारी होने के बाद काम ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। मनियर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट : सरयू नदी के सतही जल पर आधारित इस परियोजना से जिले के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र के गांवों को शुद्ध पानी मिलेगा। मनियर, बांसडीह, बेरुआरबारी, नगरा और सीयर समेत अन्य क्षेत्रों को इसका लाभ मिलेगा। सितंबर-अक्तूबर 2027 तक हनुमानगंज परियोजना पूरी करने का लक्ष्य : जल निगम ग्रामीण के अनुसार हनुमानगंज परियोजना का काम करीब 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसे अगले साल सितंबर-अक्तूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।