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मुफ्त में मुर्गा न दिया तो लाद दिए नौ मुकदमे

Wed, 22 Jul 2015 12:19 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
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थानाध्यक्ष को मुफ्त में मुर्गा न देना खेजुरी क्षेत्र के सरदहीं निवासी धनंजय को इतना भारी पड़ जाएगा, यह उसने ख्वाब में भी नहीं सोचा था। पुलिस ने उसे ऐसा फंसाया कि पिछले आठ साल से वह न्याय की गुहार लगाते यहां-वहां भटक रहा है। आठ थानों में उस पर नौ मुकदमे लाद दिए गए।
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कुछ मामलों में तो वह बाइज्जत बरी हो गया, लेकिन कुछ में न्याय के लिए उसने सीएम के बाद पीएम और फिर राष्ट्रपति तक को चिट्ठी लिखी। राष्ट्रपति कार्यालय ने धनंजय के पत्र को संज्ञान में लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। वहां से प्रमुख सचिव गृह को कार्रवाई के लिए कहा गया, लेकिन एक माह से अधिक हो गए, धनंजय को अब भी न्याय का इंतजार है।

खेजुरी थाना क्षेत्र के ग्राम सरदहीं निवासी धनंजय ने वर्ष 2004 में बांसडीह स्थित भूमि विकास बैंक से लोन लेकर मुर्गी फार्म खोला था। तीन साल बाद 2007 में गड़वार के थानाध्यक्ष एएच. जैदी ने धनंजय के फार्म से हर दूसरे दिन मुफ्त में मुर्गा मंगाना शुरू कर दिया। बार-बार की मांग से परेशान धनंजय ने अंतत: मुफ्त में मुर्गा देने से इंकार कर दिया। बस यहीं से उसका दुर्भाग्य शुरू हो गया।
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मुर्गा न मिलने से नाराज थानाध्यक्ष ने धनंजय पर अलग-अलग तिथियों में विभिन्न थानों में नौ मुकदमे दर्ज करा दिए। उस समय थानाध्यक्ष के पास सुखपुरा और खेजुरी थाने का अतिरिक्त चार्ज भी था। नौ मुकदमों में से कुछ मामलों में ट्रायल के दौरान कोर्ट ने धनंजय को बाइज्जत बरी कर दिया, लेकिन कई मामले अब भी लंबित हैैं। इससे परेशान धनंजय ने जिले के आला अफसरों से मिन्नतें की, पर सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। आखिरकार इस मामले को संज्ञान में लेते हुए सात अप्रैल को राष्ट्रपति कार्यालय ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। उन्होंने दस जून को प्रमुख सचिव गृह को जांच करने का निर्देश दिया, इसके बावजूद एक माह से अधिक हो गया धनंजय अब तक ठोकरें ही खा रहा है, जबकि उसका कारोबार चौपट हो गया और घर वालों पर आफत अलग आ गई।

लूट, हत्या के प्रयास तक का दर्ज हुआ मुकदमा
बलिया। धनंजय पर गड़वार थाने में 11 जनवरी 2007 को लूट, हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट, गुंडा एक्ट, गैंगेस्टर और चोरी के छह मुकदमे दर्ज कराए गए, जबकि मनियर थाने में 17 जनवरी 2007 और बांसडीह थाने में दो जनवरी 2007 को चोरी और बिहार की सीमा से सटे रघुनाथपुर थाने में बाइक चोरी की रिपोर्ट तत्कालीन थानाध्यक्ष एएच. जैदी ने खुद दर्ज कराई। इन मामलों के चलते धनंजय को लगभग एक साल तक जेल में रहना पड़ा था।

चार मामलों में बरी हो चुका है धनंजय
बलिया। झूठे मुकदमे में फंसाए गए धनंजय को ट्रायल के दौरान कोर्ट ने हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, गुंडा एक्ट और गैंगेस्टर में बरी कर दिया, लेकिन अन्य मामलों में उस पर अभी भी केस चल रहे हैं।

इस मामले में शासन से अभी कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र मिलने के बाद तत्कालीन इंसपेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले भी इस मामले की जांच सिकंदरपुर और बांसडीह के सीओ कर चुके हैं। - राजू बाबू सिंह, पुलिस अधीक्षक, बलिया
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