फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार करोड़ का कटानरोधी कार्य नदी में समाया

विज्ञापन
बैरिया तहसील क्षेत्र के गोपालनगर टाड़ी गांव के समीप हो रहे कटान के चलते अपना सामान सुरक्षित स्था? - फोटो : BALLIA
विज्ञापन
बैरिया। चार करोड़ रुपए की लागत से गोपालनगर टाड़ी में बाढ़ विभाग की ओर से कराए गए कटान रोधी कार्य का अस्तित्व सोमवार को समाप्त हो गया। समूचा कटानरोधी कार्य सरयू नदी में विलीन हो गया। डरे सहमे तटवर्ती लोगों ने अब तेजी से पलायन करना शुरू कर दिया है। कुछ लोग अपना आशियाना अपने हाथों उजाड़ रहे हैं, तो कुछ लोग अपनी रिहायशी झोपड़ी, ट्रैक्टरों पर लादकर अन्यत्र ले जाने पर विवश हैं। ऐसे में स्थिति ऐसी लग रही है कि इस साल गोपालनगर टाड़ी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। मौके पर बाढ़ विभाग के अधिकारी जमे हुए हैं। उपजिलाधिकारी बैरिया आत्रेय मिश्र भी सोमवार की सुबह मौके पर पहुंचकर कटान का निरीक्षण किया और तटवर्ती लोगों से बात की।
विज्ञापन

गोपालनगर टाड़ी गांव को बचाने के लिए चार करोड़ रुपए की लागत से कटानरोधी कार्य अप्रैल महीने में शुरू कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि कटान रोधी कार्य में भारी धांधली और लूट खसोट की गई है। जिओ बैग में बालू के जगह मिट्टी भरकर डाला गया था। वह भी निर्धारित मात्रा से कम था। कटान रोधी कार्य का प्लेटफार्म बनाने के स्थान पर सीधे सरयू के किनारे जियो बैग की बोरियां रख दी गई थी, जो कटान के साथ ही नदी में चली गई। लोगों का कहना है कि इस समय ही स्थिति खतरनाक बन गई है। जब नदी में पानी भर जाएगा तब क्या होगा? उक्त गांव के सूगा यादव, फूलेना यादव, गेन्दा यादव, रामजी यादव, शिवजी यादव, परशुराम यादव, श्रीराम यादव, रमाशंकर यादव, राजाराम यादव, श्री भगवान यादव, सुरेश यादव लालजी यादव, सुरेंद्र यादव, मैनेजर यादव आदि का मकान कटान की जद में है। उक्त लोग अपना आशियाना उजाड़ने लगे हैं। विडंबना यह है कि गोपालनगर टाड़ी के लोग आखिर जाएं तो कहां जाएं। पुरानी रेलवे लाइन पहले ही कटान पीड़ितों से भरी पड़ी है। अन्य कोई सार्वजनिक स्थान है नहीं, जहां वे अपना डेरा डाल सकें। फलस्वरूप अपने अपने रिश्तेदारों के तरफ रुख किए हुए हैं। कटान पीड़ित युद्धस्तर पर अपने आशियानों पर हथौड़ा चला रहे है, कटान पीड़ितों का कहना है कि जो भी हाथ लग रहा है समेट लें। अन्यथा सबकुछ नदी में समा जाएगा। करण पीड़ित गोपालनगर बालू स्थान पर खुले आसमान के नीचे डेरा डाले हुए हैं।
सरयू नदी में कटान नीचे से शुरू होने के कारण जिओ बैग का कटानरोधी कार्य क्षतिग्रस्त हुआ है, बंबू क्रेट विधि से कटान रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हम लोग दिन रात यही मौके पर कैंप किए हुए हैं। तेज हवा और निचले सतह पर बालू पर सीधे नदी की मुख्यधारा की चोट हमारा सारा योजना फेल कर दिया है। कटान रोधी कार्य के वजह से ही अब तक लोगों का मकान बचा हुआ है अन्यथा कब का नदी में विलीन हो गया होता।
विज्ञापन

अमृतलाल, एसडीओ, बाढ़ विभाग
कटान रोधी कार्य नदी में विलीन हो चुका है, कटान पीड़ितों को सुरक्षित जगह पर जाने के लिए सलाह दिया गया है, उन्हें यूसीजी नम्बर उपलब्ध करा दिया हूं। किसी तरह की दिक्कत होने पर हमें सूचित करें। बाढ़ विभाग को निर्देशित किया गया है कि बोरियों में ईंट के टुकड़े भर कर फेंके व बम्बू क्रेट विधि का उपयोग करें। कटानरोधी कार्य का कथित अनियमितता की जांच के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेज रहा हूं।
आत्रेय मिश्र, उप जिलाधिकारी, बैरिया

गोपालनगर टाड़ी के समीप हो रहे कटान के चलते अपना आशियाना अपने हाथों उजाड़ते ग्रामीण।- फोटो : BALLIA

गोपालनगर टाड़ी स्थित लोगों के घर के समीप बह रही सरयू नदी तथा खड़े ग्रामीण।- फोटो : BALLIA

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें