बलिया। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम एवं विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) हरीश कुमार की अदालत ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में चार अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए दो-दो वर्ष के साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने जेल में बिताई गई अवधि को मुख्य दंडादेश में समायोजित करने का आदेश दिया है। खेजुरी थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष सारनाथ सिंह की ओर से वर्ष 2015 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी कि अखैनी गांव निवासी अमित गिरोह का सक्रिय लीडर था, जबकि जितेन्द्र, राजेश और लालू उर्फ रंजीत उसके सक्रिय सदस्य बताए गए।
विशेष आपराधिक वाद में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को गरीब बताते हुए उन्हें साजिशन फंसाए जाने का तर्क दिया। अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि मुकदमा वर्ष 2016 से लंबित है और पत्रावली पुरानी है, इसलिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए न्यूनतम दंड दिया जाए। वहीं विशेष लोक अभियोजक ने अभियुक्तों के कृत्य को समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध बताते हुए कठोर दंड दिए जाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों व परिस्थितियों तथा अपराध की प्रकृति पर विचार करने के बाद अदालत ने चारों को दोषसिद्ध कर दो-दो वर्ष के कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते गैंगस्टर एक्ट के मामले में चार अभियुक्तों को सजा हुई।