बलिया। जिला अस्पताल में ड्रग रेसिस्टेंट ट्यूबरक्लोसिस (डीआर टीबी) सेंटर बन रहा है। यह चार बेड का होगा। गंभीर टीबी के मरीजों को दो दिन रखकर उनका इलाज किया जाएगा। डीआर टीबी सेंटर में उपचार नि:शुल्क होगा। जल्द ही मरीजों को इस सेंटर की सुविधा मिलने लगेगी।
मल्टीड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एमडीआर टीबी के इलाज को आसान बनाने के लिए सरकार ने प्रभावी कदम उठाया है। पहले एमडीआर टीबी से पीड़ित मरीजों को 24 महीने तक दवा खानी पड़ती थी। अब ऐसे मरीजों को सिर्फ 6 से 8 महीने तक ही दवा खानी पड़ेगी। सरकार ने बीडाक्विलिन नामक दवा की शुरुआत की है। जिला क्षय रोग अधिकारी डा. आनंद कुमार ने बताया कि क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम (आरएनटीसीपी) में एमडीआर टीबी के मरीजों के इलाज के लिए नई बीडाक्विलिन दवा को शामिल किया गया है। यह दवा डीआर टीबी सेंटरों के माध्यम से ही टीबी के गंभीर मरीजों को नि:शुल्क दी जाएगी। इन पर फर्स्ट लाइन की दवाएं असरहीन साबित होती हैं। पहले एमडीआर टीबी के मरीजों का इलाज दो साल तक चलता था। इसमें 60 फीसद मरीज ही पूरी तरह ठीक हो पाते थे, जबकि कुछ बीच में इलाज छोड़ देते थे। नई दवा आने से मरीजों के ठीक होने की संभावना और बेहतर हो जाएगी। बीडाक्विलिन की उपलब्धता सिर्फ सरकारी विभाग के पास ही होगी।
दवा का पूरा कोर्स ही बचाव
टीबी से ग्रसित मरीजों द्वारा टीबी की दवा का पूरा कोर्स नहीं करने के कारण एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। अनियमित टीबी दवा का सेवन करना, बिना चिकित्सीय परामर्श के दवा दुकानों से टीबी की दवा लेना और टीबी की दवा खाने से पहले ड्रग सेंस्टेविटी जांच नहीं होने से भी एमडीआर टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। टीबी का सम्पूर्ण एवं सटीक इलाज सरकारी स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध है।