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Ballia News: भृगु कॉरिडोर की नींव पड़ी, 100 करोड़ से बनेगा मुख्य द्वार और होगा सुंदरीकरण

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नगर के भृगु मंदिर परिसर में भृगु कॉरिडोर के निर्माण के लिए भूमि पूजन करते परिवहन मंत्री दयाशंकर
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बलिया। महर्षि भृगु की तपोभूमि में वर्षों से देखे जा रहे भृगु कॉरिडोर के सपने ने रविवार को धरातल पर आकार लेना शुरू कर दिया। शहर स्थित ऐतिहासिक भृगु मंदिर परिसर में संत-महात्माओं के सानिध्य में परिवहन मंत्री एवं सदर विधायक दयाशंकर सिंह ने विधि-विधान से भूमि पूजन कर परियोजना की शुरुआत की।
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महाआरती में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और भृगु बाबा के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। पहले चरण के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ है, जबकि पूरी परियोजना पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि भृगु कॉरिडोर का वर्षों पुराना सपना अब जमीन पर उतर चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च में परियोजना को मंजूरी दी थी। कॉरिडोर के तहत मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को बरकरार रखते हुए परिसर को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। दो चरणों में होने वाले काम में भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, मंदिर परिसर का विस्तार, सुंदरीकरण, चौड़े रास्ते, व्यवस्थित गलियारे और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास शामिल है। परिवहन मंत्री ने कहा कि बलिया भृगु बाबा के नाम से जाना जाता है। कॉरिडोर बनने के बाद भृगु मंदिर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास होगा। यह केवल निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि बलिया की आस्था, पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है। सप्त ऋषियों की बनेगी आर्ट गैलरी : कॉरिडोर परिसर में सप्त ऋषियों से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। आर्ट गैलरी और विवरण पट्टिकाएं लगाने की योजना है। इनमें गौतम ऋषि, परशुराम, महर्षि वाल्मीकि, मेधा ऋषि, कुशी ऋषि, पराशर ऋषि समेत अन्य ऋषियों के जीवन और परंपरा से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
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संत-महात्माओं की मौजूदगी में हुई महाआरती : भूमि पूजन के बाद संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में महाआरती हुई। दीपों की कतार और भृगु बाबा के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कॉरिडोर निर्माण की शुरुआत को बलिया की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया। मान्यता है कि महर्षि भृगु ने गंगा तट स्थित इस क्षेत्र में तपस्या की थी, जिसके कारण यह क्षेत्र भृगु क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ। भृगु आश्रम और मंदिर आज भी इस धार्मिक परंपरा के प्रमुख केंद्र हैं। महर्षि भृगु के शिष्य दर्दर मुनि की परंपरा को बलिया के प्रसिद्ध ददरी मेले से जोड़ा जाता है।
ये रहे मौजूद : पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, पूर्व सांसद भरत सिंह, पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, स्वामी हरिहरानंद, बड़ी मठिया के रामूदार दास, गायत्री शक्तिपीठ के विजेंद्र चौबे, भृगु मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शिवकुमार मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय, इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय मौजूद रहे।
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