संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत वर्ष 2002 से 2006 के बीच उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में करोड़ों रुपये का खाद्यान्न घोटाला हुआ था। घोटाले में आईएएस अधिकारी सहित डीएसओ, तहसीलदार, सीडीओ, पीडी, बीडीओ, कोटेदार आदि सहित 6055 लोगों पर गबन का मुकदमा दर्ज हुआ था।
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत वर्ष 2002 से 2006 के बीच हुए करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा वाराणसी (ईओडब्ल्यू) की टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के मनियर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रभुनाथ पटेल व मानिकपुर के कोटेदार ऋषिदेव सिंह व तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव व निपनिया गांव निवासी तुलसीराम को मनियर पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार कर साथ ले गई। आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही मनियर थाना क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
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खाद्यान्न घोटाले में आईएएस अधिकारी सहित डीएसओ, तहसीलदार, सीडीओ, पीडी, बीडीओ, कोटेदार आदि सहित 6055 लोगों पर गबन का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें जनपद के 17 ब्लॉकों के कोटेदार, अधिकारी व कर्मचारी आरोपित थे।
बताया जाता है कि कुछ दिन पूर्व विधान सभा के आश्वासन समिति की बैठक में बलिया और जौनपुर में हुए घोटाले की जांच और हुई कार्रवाई की समीक्षा हुई थी। इसके बाद ईओडब्ल्यू की टीम सक्रिय हुई और आरोपियों की धर-पकड़ में जुट गई। इस बाबत ईओडब्ल्यू के इंस्पेक्टर कृष्ण मुरारी मिश्रा ने बताया कि खाद्यान्न घोटाला में कार्रवाई की गई है। थानाध्यक्ष मनियर शैलेश सिंह ने बताया कि पूर्व प्रमुख प्रभुनाथ पटेल, कोटेदार ऋषि देव सिंह, सचिव तुलसीराम की गिरफ्तारी हुई है।