बलिया। तीन सालों तक प्रांतीय सीमा भरौली में स्थित गंगा पुल को बंद दिखाकर करोड़ों के राजस्व गोलमाल की जांच शुरु हो गई है। बुधवार को विभाग के आजमगढ़ के वन संरक्षक आरसी झा ने कार्यालय में इस मामले की पड़ताल की और गैर प्रांत से आने वाले वन उपज व की गई राजस्व वसूली की समीक्षा की।
आला अफसर के एकाएक धमकने और राजस्व के गोलमाल से संबंधित जांच करने को लेकर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों में खलबली मची रही। वन संरक्षक ने विभाग के अधिकारियों से प्रांतीय सीमाओं पर की तैनाती, गैर प्रांत से आने वाले वन उपज से होने वाले राजस्व वसूली आदि की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को प्रांतीय सीमाओं पर निगरानी तेज करने का निर्देश देते हुए कहा कि लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो वन संरक्षक कई पत्रावलियों को अपने साथ भी ले गए और कयास लगाए जा रहे हैं कि जांच में कई रेंजर, वन दरोगा व अन्य कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है।
वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूल करने के लिए प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया और वर्ष 2012 में वैट लागू होने पर चेकपोस्ट को हटाकर वन विभाग ने प्रांतीय सीमाओं पर प्रवर्तन दल की तैनाती की।
प्रवर्तन दल की ओर से बिहार से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा। 12 मई 2014 को भरौली-बक्सर के बीच बने गंगा पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होने के बाद वन विभाग ने प्रवर्तन दल को समाप्त कर दिया, छोटे वाहनों से बिहार से वन आने का सिलसिला चलता रहा।
नियमानुसार प्रवर्तन दल हटाने पर गैर प्रंात से आने वाले वन उपज पर जुर्माना लगाने की व्यवस्था है। लेकिन यह काम तीन सालों में महज आठ-नौ वाहनों पर ही किया गया। जबकि पुल बंद होने के बाद से भरौली गंगा पुल के रास्ते छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि लाने का काम बड़े पैमाने पर चलता रहा।
वन विभाग ने कागजों में पुल को बंद तो दिखाया लेकिन रेंज स्तर से कर्मचारियों की तैनाती की जाती रही जो वसूली करते रहे लेकिन राजस्व खाते में जमा नहीं किया और करोड़ों का वारा-न्यारा कर दिया। इसका खुलासा ‘अमर उजाला’ के करने और इसी बीच क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री के निर्देश पर डीएफओ ने फेफना के रेंजर सत्येन्द्र सिंह जो सिद्धार्थनगर स्थानांतरण के बावजूद यहां जमे थे उन्हें कार्यमुक्त कर दिया और दो वनकर्मियों को अलग-अलग रेंज से सम्बद्ध कर दिया। डीएफओ ने जांच की बात कही लेकिन 10 दिनों बाद जांच नहीं होने और लीपापोती की संभावना के अमर उजाला ने एकबार फिर संभावना जताई तो विभाग के आला अफसर हरकत में आ गए।
भरौली सीमा पर अभी भी चल रहा खेल!
बलिया। एक ओर प्रांतीय सीमा पर हुए करोड़ों के गोलमाल की जांच वन विभाग के आला अफसर ने शुुरु कर दी है वहीं भरौली स्थित वन कर्मियों का खेल बदस्तूर जारी है। फेफना के रेंजर की मानें तो प्रतिदिन 20 वाहनों से करीब 22 हजार जुर्माना की वसूली की जा रही है जबकि शाम से लेकर अगले दिन भोर तक लगातार छोटे वाहनों से खासकर लाल बालू व कोयला बिहार की ओर से लाया जाता है।
वन संरक्षक आजमगढ़ बुधवार को जिले में आए थे और बिहार से आने वाले वन उपज और उनसे होने वाली राजस्व वसूली की जानकारी ली। उन्होंने सीमा पर कड़ाई करने और प्रत्येक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। राम अवतार सिंह, डीएफओ, बलिया