बलिया। जिले में पहली बार इफको की ओर से ड्रोन से धान के खेतों में छिड़काव किया गया। सोहांव ब्लॉक के नारायणपुर गांव के दो किसानों की खेतों में सोमवार को तरल उर्वरक व कीटनाशक के घोल का छिड़काव हुआ। इफको की केंद्रीय टीम ने यह कार्य किया। इसके पीछे इफको की ओर से तरल उर्वरक को बढ़ावा देना भी उद्देश्य है।
ड्रोन तकनीक से सैकड़ों एकड़ में लगे धान के खेत में किसान एक साथ दवा का छिड़काव कर सकते हैं। जिससे दवा और समय दोनों की बचत होगी। समय के अभाव में किसान दवा का छिड़काव नहीं कर पाते हैं जिससे फसलों में रोग लग जाने से फसल बर्बाद होती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। भारत सरकार की ओर कृषि कार्याें में ड्रोन इस्तेमाल की सुविधा दे दी है। अब प्रदेश सरकार की ओर से इसकी पहल की गई है। इसकी एक झलक सोमवार को कोटवां नारायनपुर गांव में देखने को मिला।
बताया जाता है कि नारायनपुर गांव के चौधरी रामजी राय समेत दो किसानों ने महीनों पहले इफको के अधिकारियों से संपर्क कर ड्रोन से उर्वरक व कीटनाशक आदि के छिड़काव की सुविधा मांगी थी। इफको के केंद्रीय अधिकारियों की ओर से अनुमति मिलने के बाद सोमवार को ड्रोन के साथ इफको की टीम पहुंची और खेतों में छिड़काव किया। पहले दिन दो किसानों के करीब 10 एकड़ खेतों में नैनो यूरिया, सागरिका आदि के घोल का छिड़काव किया। जिले में पहली बार ड्रोन से छिड़काव की जानकारी होने पर आसपास के किसानों की भीड़ लगी रही और सभी इस सुविधा को लेने के बारे में जानने के लिए इफको टीम से संपर्क करने में जुटे रहे।
15 मिनट में एक एकड़ का हो सकता है छिड़काव
फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार लगातार नई तकनीक को बढ़ावा दे रही है। ड्रोन तकनीक से महज 15 मिनट में एक एकड़ भूमि पर तरल उर्वरक या कीटनाशक आदि के घोल का छिड़काव किया जा सकता है। ड्रोन सभी प्रकार की खेती के लिए फायदेमंद है।
किसानों को मिलेगी राहतड्रोन तकनीक के उपयोग से श्रमिक की आवश्यकता भी नहीं होती है। ड्रोन तकनीक से उर्वरक उपयोग क्षमता अधिक होती है। इस तकनीक का उपयोग कर कृषक अपनी कृषि लागत को कम कर सकते हैं। आज के समय में जब कृषि मजदूर कम मिलते हैं और मिलते भी हैं तो उन्हें अधिक दिहाड़ी देनी पड़ती है। ऐसे में यह तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित होगी।
ड्रोन से खेतों में छिड़काव की सुविधा इफको की ओर से देने का प्रावधान है। हालांकि अभी जिले में ड्रोन की सुविधा नहीं है। ड्रोन से छिड़काव में किसानों की लागत में कमी आएगी। अगर किसान इसकी मांग करेंगे तो उन्हें उपलब्ध कराए जाएंगे। - पवन कुमार प्रजापति, जिला कृषि अधिकारी, बलिया