बैरिया। पंद्रह वर्ष पूर्व करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले का मामला फिर चर्चा में आ गया है। संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत हुए घोटाले की जांच में पत्रावलियां नहीं देेने के कारण ब्लॉक के तत्कालीन 36 ग्राम विकास और पंचायत अधिकारियों के खिलाफ मंगलवार की शाम पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। नौ माह पूर्व बैरिया के तत्कालीन बीडीओ पीके सिंह ने इन कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी लेकिन केस अब दर्ज किया गया।
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 2002 से 2005 तक काम के बदले अनाज दिया जाता था। इसके तहत प्रत्येक मजदूर को मजदूरी के बदले प्रतिदिन पांच किलो खाद्यान्न व 23 रुपये नकद देने का प्रावधान था लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। इसकी जांच आज भी ईओडब्ल्यू वाराणसी इकाई कर रही है। ईओडब्ल्यू की ओर से कई बार संबंधित कर्मचारियों से अभिलेखों की मांग की लेकिन संबंधित कर्मचारियों की ओर से प्राक्कलन, मस्टरोल व वाऊचर उपलब्ध नहीं कराया गया। जिसके बाद जांच एजेंसी ने शासन को मामले से अवगत कराया। शासन के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ने तत्कालीन बीडीओ को संबंधित कर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराने को कहा। तत्कालीन बीडीओ पीके सिंह ने बैरिया पुलिस को 36 तत्कालीन कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी लेकिन लगभग 9 महीने बाद पुलिस ने मंगलवार की रात मुकदमा दर्ज किया।
आरोपियों में कुछ हो चुके हैं दिवंगत तो कुछ सेवानिवृत्त
बैरिया। खाद्यान्न घोटाले में जिन्हें आरोपी बनाया गया है उनमें से कुछ लोगों की मौत हो गई है और कुछ सेवानिवृत्त हो चुकी है। जिन पर प्राथमिक दर्ज हुई है, उनमें रामजी मिश्र, धनंजय मिश्र, हरेंद्र प्रताप सिंह, अमरनाथ शर्मा, रामचंद्र यादव, त्रियुगी नारायण सिंह, रामजी सिंह, रामेश्वर प्रसाद, राजेश्वर वर्मा, रामेश्वर प्रसाद, बरमेश्वर राम, विनय कुमार सिंह, शिवशंकंर यादव, लालबाबू, अवध किशोर सिंह, अवध किशोर ओझा, शंभूनाथ लाल, प्रभुनाथ यादव, गनपत राम, सुरेंद्र मिश्र, अंतनि कुमार, ओमप्रकाश पांडेय, अमरनाथ शर्मा, मनोज गुप्त, राजेंद्र सिंह, विनोद सिंह, रामबहादुर राम, हरेराम मिश्र, हलवंत तिवारी, दिनेश प्रसाद, रामनाथ सिंह, रामेश्वर शर्मा, कुबेर राम, पतिराम कुशवाहा व ओमप्रकाश सिंह शामिल हैं। जिन 36 कर्मियों पर मुकदमा दर्ज हुआ है उनमें अधिकांश सरकारी नलकूप चालक हैं जो कल्याण सिंह के शासन काल में ग्राम विकास या पंचायत अधिकारी बनाए गए थे। हालांकि बाद में इन्हें मूल विभागों में वापस कर दिया गया था।
कोट
बीडीओ की तहरीर पर 36 कर्मियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। अगर आरोपी दस्तावेज नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ अगली कार्रवाई की जाएगी।- अशोक कुमार सिंह, सीओ, बैरिया।
कोट
तत्कालीन सचिवों से बार-बार दस्तावेजों की मांग की गई लेकिन वह उपलब्ध नहीं करा सके। दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं तो उनको राहत मिल जाएगा, अन्यथा की स्थिति में कार्रवाई होगी।- कृष्ण मुरारी मिश्र, इंस्पेक्टर, ईओडब्लू, वाराणसी