मझौवां। रामगढ़ और हुकुम छपरा में राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को बचाने के लिए दो कटानरोधी परियोजनाओं का कार्य चल रहा है। काम को पूरा करने लिए बाढ़ विभाग की तय समय-सीमा 15 जून को समाप्त हो गई। 50 फीसदी ही कार्य हुआ है। काम अधूरा रहने से बाढ़ के समय सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर एवं उड़ई छपरा को ज्यादा नुकसान की आशंका है।
सुघर छपरा के लोगों ने अपने गांव को बचाने के 4 जून को निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता (जल संसाधन) राकेश कुमार तथा अधीक्षण अभियंता से अपने गांव को बचाने के लिए गुहार लगाई थी। मुख्य अभियंता व अधीक्षण अभियंता ने आश्वासन दिया था कि तय मानक को ध्यान में रखते हुए 15 जून से पहले कटानरोधी कार्य करा दिया जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं हो सका।
सुघर छपरा में एनएच -31 की सुरक्षा के लिए 27.500 से 27.950 के बीच 8 करोड़ 30 लाख 59 हजार रुपये से चार कटर का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा एनएच-31 के किमी 26.250 पर 5 करोड़ 5 लाख रुपये की लागत से एक स्पर का निर्माण कार्य चल रहा है।
चार जून तक रिपोर्ट नहीं दी गई : मझौवां। बाढ़ आपदा प्रबंधन नियमावली के अनुसार जिला प्रशासन की तरफ से शासन को चार जून तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी पड़ती है कि वह जनपद में बाढ़ व नदी के कटान जैसे हालत में लड़ने के लिए कितना तैयार है, लेकिन यहां तो ठीक उलट है, अर्थात कार्य ही जून के दूसरा सप्ताह बीत गया लेकिन कटानरोधी कार्य की गति और मजदूरों की संख्या की बात करें तो सम्भव है कि इस वर्ष भी गंगा की लहर तांडव मचा सकती है।
बलिया के बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता, संजय मिश्र ने बताया कि सुघर छपरा गांव का दर्द मैं समझ रहा हूं। कटान निरोधक कार्य को मानक के अनुसार तय सीमा को देखते हुए ठेकेदार को कराने का आदेश दिया गया है। संसाधन व मजदूरों की संख्या बढ़ाकर कार्य में तेजी लाने की भी हिदायत दी गई हैं। हर हाल में 30 जून से पहले कार्य को पूरा कर दिया जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित ठेकेदार के ऊपर कार्रवाई तय है। संवाद