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पांच वर्ष में पांच हजार को प्रशिक्षण, रोजगार सिर्फ 49 को मिला

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बलिया। जिले में युवाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए चार योजनाओं में सात ट्रेडों के तहत बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षित करने का अभियान उद्यमिता विकास व प्रोत्साहन विभाग के द्वारा चलाया जा रहा है, जिनमें मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, एक जिला एक उत्पाद योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शामिल हैं। इनमें करीब पांच हजार लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें सिर्फ 49 लोगों को रोजगार मिला।
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उद्यमिता विकास एवं प्रोत्साहन विभाग के जिला उपायुक्त राजीव कुमार पाठक बताते हैं कि बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए उन्हें बकायदा कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके उपरांत उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय बैंकों से ऋण मुहैया कराया जाता है। बताया कि बीते पांच वर्षों के दौरान जिले में विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 4925 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें करीब 1450 महिलाएं हैं। इनमें महज एक फीसदी को स्वरोजगार के लिए बैंकों द्वारा ऋण दिया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए अब तक 286 युवाओं ने आवेदन किया है, जिनमें 29 आवेदकों का ऋण स्वीकृत हुआ है। जबकि 13 लोगों में ऋण वितरित कर दिया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 242 आवेदकों ने आवेदन किया, जिनमें 16 स्वीकृत हुआ है। बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत 15 लोगों ने आवेदन किया है, जिनमें पांच का लोन स्वीकृत हुआ है। साथ ही ओडीओपी के तहत विभिन्न बैंकों में 42 आवेदन भेजे गए, जिनमें महज दो ही स्वीकृत हुए हैं।
पीएमकेवाई के तहत पांच वर्ष प्रशिक्षित हुए तीन हजार
उद्यमिता विकास व प्रोत्साहन विभाग के उपायुक्त राजीव कुमार पाठक ने बताया कि अब तक ओडीओपी के तहत करीब 700 महिलाओं को टिकुली बनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा सिलाई-कढ़ाई के लिए 225 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पाठक ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत 500 पुरुषों और दस महिलाओं को विभिन्न कौशलों के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। बताया कि पिछले पांच वर्षों में प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना के तहत करीब तीन हजार लोगों को प्रशिक्षित करते हुए उनकों स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया गया। जिनमें 1800 पुरुष और 1200 महिलाएं शामिल रहीं।
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कौशल प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों में दक्षता और मार्केटिंग का अभाव और योजनाओं का बेजा लाभ लेने की मंशा के कारण लोन देने से पूर्व अभ्यर्थियों को चिन्हित किया जाता है। बैँकों की ओर से जांच में संदेह होने की स्थिति में पत्रावली वापस कर दी जाती है। जो काम करने वाले लोग हैं उन्हें सहजता से बैंक ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। यह स्थिति बैंकों की मजबूरी हो गई है, क्योंकि बलिया में पूर्व में दिए गए लोन में करीब 160 करोड़ रुपये की रिकवरी शेष है, जिसकी ऑनलाइन आरसी कटने के बावजूद स्थिति में सुधार नजर नहीं आ रहा है।
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अशोक पांडेय, एलडीएम, बलिया
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