घाघरा में लगातार बढ़ रहे जलस्तर से लीलकर और खरीद के किसानों की पांच एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो गई है । कई एकड़ भूमि पानी से डूब गई है। इससे किसान मायूस और भयजदा हैं।
क्षेत्र के किसान राजेंद्र यादव, वीर बहादुर, विजय मिश्र, महेश, दिनेश, पंकज आदि का कहना है कि शासनिक और प्रशासनिक उपेक्षा तथा निरोधात्मक अभाव के कारण दियारे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बिगड़ रही है।
प्रत्येक वर्ष सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि घाघरा में विलीन हो रही है। इससे दियारे क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर आ चुका है। नदी भी टीएस बंधे के नजदीक आ रही है। यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब दियारे में क्षेत्र में भारी तबाही होगी।
डेढ़ दशक पूर्व क्षेत्र के सिसोटार, कठौड़ा, डूहाबिहरा, लीलकर, गोसाईपुर, बसारिकपुर, खरीद, निपनिया आदि दियारे में कोई कटान नहीं होती थी लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज नदी का रुख सीधा इन गांवों की ओर हो गया है। कहा कि प्रत्येक वर्ष कटान के रोकने नाम पर कराड़ों रुपये खर्च करने के लिए आते हैं। ताकि विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार बंदरबांट कर लेते हैं।