बलिया। धान की कटाई के बाद किसानों की पराली जलाने की आदत और उससे होने वाला प्रदूषण एक राष्ट्रीय समस्या बन कर उभरा है। हर साल पराली जलाने की वजह से वायु प्रदूषण बहुत हानिकारक स्तर तक बढ़ जाता है। हालांकि अब प्रदेश की योगी सरकार एक ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे पराली जलाने की गंभीर समस्या से राष्ट्रीय स्तर पर निजात मिलने की उम्मीद जगी है। जिसके तहत किसानों को गौशालाओं से जोड़ा जा रहा है। जिला स्तर पर ऐसी योजना शुरू की गई है कि किसान पराली लदी गाड़ी लेकर आएं और गोबर की खाद लेकर जाएं। वैसे तो यह किसानों के लिए बहुत फायदे का सौदा है, लेकिन जिले के अधिकांश किसान या तो इस योजना से वाकिफ नहीं है या फिर वो खेती के पुराने ढर्रें पर कायम है। इसी के चलते शासन के निर्देश पर पराली जलाने को लेकर सख्ती बरती जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से सभी तहसीलों के एसडीएम व थाना प्रभारियों को पराली जलाने वालों पर नजर रखने को कहा गया है। साथ ही लेखपालों के जरिये धान की खेती करने वाले सभी किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए नोटिस भी दी गई है। इसके अलावा सेटेलाइट से भी नजर रखी जा रही है।
बता दें कि इसके पहले बांसडीह तहसील क्षेत्र के कैथवली गांव में पराली जलाने पर नायब तहसीलदार अंजू यादव ने दो किसानों पर कार्यवाही थी। साथ ही आस पास चल रही कंबाइन मशीन मालिकों को शासन की गाइड लाइन का पालन करने का निर्देश दिया था। जबकि बिना रेपड़ चल रही कंबाइन मशीनों को पुलिस अपने साथ लेकर चली गई थी। नायब तहसीलदार ने पराली जलाने वाले दोनों किसानों पर दो हजार पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाया था। लेकिन इस कारवाई को किसानों ने गंभीरता से नहीं और प्रशासन की नजरों से बच-बचाके पराली जलाने का काम करते रहे।
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जिले में पराली जलाने की यह दूसरी घटना है। यहां के अधिकांश किसान पराली को विकल्प के रूप में प्रयोग कर रहे है। इसके बावजूद कुछ किसान बाज नहीं आ रहे हैं। शायद इन किसानों को अंदाजा नहीं कि कोई नजर रख रहा है, जबकि सैटेलाइट से मॉनिटरिंग में ये पकड़े गये।
गुलाबचंद्रा, सदर तहसीलदार, बलिया
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