कानपुर की तरह बलिया जिले में भी सीमावर्ती इलाके में दो तरफा तस्करी व अवैध खनन को लेकर एसओ और सीओ के बीच रार सामने आ चुकी है। हालांकि इसे आला अफसरों ने नजरअंदाज कर दिया है। तस्करी में शामिल कई गाड़ियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नंबर की हैं, जिन्हें कुछ माह पहले यहां लाया गया है। हालांकि इसकी पड़ताल करने की कोशिश भी नहीं की गई।
सीमावर्ती इलाकों में होने वाली दो तरफा तस्करी पर लगाम लगाने से अधिकारी भी बचते हैं क्योंकि तस्करों को सफेदपोश का संरक्षण होता है। सब कुछ जानते हुए भी पुलिस मौन रहती है। बताया जाता है कि इस गोरखधंधे का हिस्सा आला अफसरों से लेकर सफेदपोशों तक पहुंचता है। जबकि इस दोतरफा तस्करी से हर महीने लाखों रुपये सरकारी राजस्व की क्षति होती है।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की स्थिति में तस्कर कुछ दिनों तक शांत रहते हैं और इसके बाद सत्ताधारियों से नजदीकियां बनाकर धंधा जारी रखते हैं। भरौली गंगा पुल के रास्ते होने वाली दोतरफा तस्करी में छोटे-बड़े करीब 200 वाहनों का प्रयोग होता है, जो यूपी से अनाज, अवैध शराब, पशु आदि लेकर जाते हैं और बिहार से लाल बालू, कोयला, सरिया, चंदन की लकड़ी,मोटर पार्ट्स आदि सामान लेकर आते हैं।
लेकिन इसमें 50 से अधिक ऐसे वाहन हैं जो पिछले कुछ माह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाए गए हैं और इन्हें पुलिस भी नहीं रोकती है। इतना ही नहीं, अवैैध शराब का जखीरा तो पकड़ा जाता है लेकिन धंधेबाज कभी नहीं पकड़े जाते।
गंगा किनारे कोटवां नारायनपुर से लेकर बैरिया तक जगह-जगह सफेद बालू का खनन भी बड़े पैमाने पर होता है। तीन माह पहले सफेद बालू लदे वाहनों को पकड़ने को लेकर नरही थाने में ही सीओ व एसओ के बीच रार सामने आई थी। लेकिन अफसरों ने मामले पर पर्दा डाल दिया। अब कानपुर की घटना जब सामने आई है तो लोग दबी जुबां कानपुरी कनेक्शन की चर्चा भी करने लगे हैं।