वट सावित्री का पर्व रविवार को श्रद्धालु महिलाओं ने मनाया। सुबह से ही व्रती महिलाएं वट वृक्ष के नीचे पुष्प, माला, सिंदूर, मौली से पूजा कीं।
इसके बाद वट वृक्ष की परिक्रमा के पश्चात पंखा, जल से पूर्ण कलश, अन्न, फल, वस्त्र और दक्षिणा आचार्य को दान किया।
हिंदू धर्म ऐसी मान्यता है कि जब सावित्री के पति सत्यवान को यमराज परलोक ले जा रहे थे तो पतिव्रता धर्म के प्रभाव से सावित्री यमराज को प्रभावित करके अपने पति का प्राण वापस कर लीं। इससे पति सत्यवान पुन: जीवित हो गए। तभी से महिलाएं प्रतीक स्वरूप वट वृक्ष का पूजा करती हैं और पति के दीर्घायु की कामना की।