पितृपक्ष के अंतिम दिन पितरों को पिंडदान और अमवस्या स्नान करने के लिए रविवार को भोर से ही हजारों लोग शिवरामपुर गंगा तट पर पहुुंचकर स्नान किया। प्रमुख नदी तटों पर भी यही नजारा देखने को मिला। इसी के साथ ही पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान का कार्य भी आरंभ हो गया था।
नदी तट पर काफी दूर-दराज से लोग पहुंचे थे। नगर के महावीर घाट से शिवरामपुर घाट तक सैकड़ों वाहन घंटों जहां-तहां फंसे रहे। मुख्य स्नान घाट पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। पुरोहितों ने पिंडदान और तर्पण कराया। इसके साथ ही लोगों ने जमकर दान-पुण्य किया।
सोमवार को गंगा, घाघरा, सरयू सहित अन्य सरवरों पर लोगों ने अपने पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान किया। इस दौरान पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान पूरे कराए। नगर के कीनाराम घाट लोगों की भीड़ से पटा रहा। आस्था, श्रद्धा और पितरों के प्रति लोगों ने गंगा स्नान कर तर्पण किया।
मान्यता यह है कि श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। नगर के कीनाराम घाट, शिवरामपुर घाट, भरसर घाट, पचरूखिया घाट, मझौवा घाट, उजियार घाट, मांघी घाट, जवहीं दियारा घाट आदि जगहों पर स्नान कर तर्पण कार्य किया गया।