बैरिया क्षेत्र के सुदिष्ट बाबा मठ प्रांगण में धनुष यज्ञ मेले के लिए दुकानदारों द्वारा लगाया जा र?
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बैरिया। ऐतिहासिक सुदिष्ट बाबा धनुष यज्ञ मेला आज से यानी 19 दिसंबर से शुरू हो रहा है। तीन सप्ताह तक चलने वाले इस मेले की औपचारिक तैयारियां पूरी हो गई हैं। सुदिष्ट बाबा की समाधि के पीछे वाले खेतों में तंबू और शमियाने सजने लगे हैं। बताया जाता है कि 19वीं सदी के करीब संत सुदिष्ट बाबा ने यहां धनुष यज्ञ मेला लगाने की शुरुआत कराई। पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार के गांवों तक के लोग मेले में पहुंचते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, अगहन की एकादशी तिथि को सुदिष्ट बाबा अपने आश्रम पर नौ वेदियों को स्थापित कर उस पर विद्वत ब्राह्मणों को बैठाकर रामायण, महाभारत, भागवत और पुराण आदि की कथा करते थे। इसे सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती थी। रात्रिकाल में वाराणसी से आई रामलीला मंडली रामलीला का मंचन करती थी। अगहन शुक्ल पंचमी को धनुष यज्ञ का मंचन होता था, जिसमें राम और सीता का पाठ करने वाले ब्राह्मण युवक और कन्या का विधिवत विवाह कराकर सुदिष्ट बाबा स्वयं कन्यादान करते थे। बुजुर्ग बताते हैं कि सुदिष्ट बाबा कहते थे कि हमारे तो रिश्तेदार नातेदार साधु संन्यासी ही हैं, सो देश के कोने-कोने से साधु संन्यासी बुलाए जाते थे और क्षेत्र के लोगों का भी चलावा होता था। पंचमी के दिन बाकायदा बरात का दृश्य उपस्थित किया जाता था और क्षेत्र के लोग हाथी, घोड़ा पैदल उपस्थित होते थे। नौ दिनों तक चली कथा सुनने वाले धर्मानुरागी तथा क्षेत्र के लोग अपने-अपने घरों से आटा, दाल, चावल, सब्जी, तेल, घी, दही, पैसा आदि पहुंचा देते थे। बड़े पैमाने पर भंडारा होता था। क्षेत्र के लोग प्रसाद ग्रहण करते थे। समय बीतने के साथ मेला आधुनिक होता गया। गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सामग्रियों की दुकानें लगने लगीं। सुदिष्ट बाबा के आश्रम पर परंपरागत वेदियां बनाकर कथा सुनवाने की परंपरा आज भी कायम है। ग्राम प्रधान जनक दुलारी देवी ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए 10 जनवरी तक मेले की अनुमति मिल गई है। मेलार्थियों और व्यापारियों की सुविधाओं का समुचित ध्यान रखा जाएगा।