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UP: पानी न मिलने से किसानों की सिंचाई ठप, उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन; बोले- नहीं सुनी जा रहीं शिकायतें

Fri, 25 Jul 2025 12:08 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से पंदह रजबाहा में सिंचाई नहीं हो पा रही है। इस कारण किसान भी परेशान हो रहे हैं। किसानों ने इस बाबत उपजिलाधिकारी को भी अवगत कराते हुए समाधान की मांग की है।
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खेत में पानी के लिए चिंता व्यक्त करता किसान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Ballia News: सिकंदरपुर के पंदह रजबाहा में सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों में गुस्सा है। गुरुवार को समाजसेवी रवि राय के नेतृत्व में गांव के किसानों ने उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर सुनील कुमार को ज्ञापन सौंपा। रजबाहा में पानी छोड़े जाने की मांग की।

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ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया कि रजबाहा से जुड़े गांवों के किसान विगत कई सप्ताह से पानी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक एक भी बार नहर में पानी नहीं छोड़ा गया। किसानों का कहना है कि उनकी सिंचाई का एकमात्र साधन यही रजबाहा है। पानी नहीं मिलने के कारण उनकी धान की रोपाई तक शुरू नहीं हो सकी है, जिससे फसल उत्पादन और उनकी आजीविका पर संकट मंडराने लगा है।

किसानों ने इस स्थिति को सूखे जैसी आपदा बताते हुए प्रशासन से मांग की कि तत्काल नहर में पानी छोड़ा जाए ताकि समय पर रोपाई हो सके और किसानों का जीवनयापन बाधित न हो। सतीश यादव गोलू, प्रकाश सिंह, शकील अंसारी, बृज बिहारी चौहान, अरविंद सिंह, अशोक चौहान, मंजय चौहान, अभिषेक चौहान, सतीश सिंह, बिनय यादव, हरिंदर, चंद्रभान सिंह, मेवालाल, सचिन सिंह, सूर्यभान सिंह, गौरी शंकर चौहान, चंद्रशेखर सिंह, मुन्ना सिंह, कमलेश चौहान और अर्जुन सिंह रहे।

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नहरों में पानी नहीं, किसान परेशान
मौसम की बेरुखी से सीयर ब्लॉक के सभी गांवों में किसान धान की रोपाई करने के लिए परेशान हैं। दोहरीघाट तुर्तीपार सहायक नहर परियोजना की नहरों में पानी नहीं है। समाजसेवी विनोद मानव ने बताया कि सूखा एक प्राकृतिक आपदा है, परंतु इससे निपटने के संसाधन भी वर्षों से उपेक्षित हैं। 

नहरें दशकों से सिर्फ सफाई के नाम पर कागजों में साफ होती हैं, जबकि जमीन पर किसान पानी की एक बूंद को तरसते हैं। किसान राजीव यादव, फूलबदन, अनिल, राजेश यादव, रामाश्रय आदि का कहना है कि नहर की सफाई पर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं, फिर भी नहरें सूखी हैं। चखसेखानी, रामगढ़, भिटौरा, भुवारी, जिउतपुरा, गंगऊपुर, भदहर, खडेजी जैसे गांवों में धान की बहुत कम रोपाई हुई है।
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