राजस्व संहिता संसोधन बिल लागू होने के बाद जहां भूमिधर उहापोह की स्थिति में हैं। वहीं किसानों की खेती-बारी भी इस संशोधन से पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। जबकि दूसरी तरफ गुरबत में जीने वाले किसानों की रोजी रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे है। ऐसे में भूमिधर अब छोटे किसानों को लगान और बटाई पर दी गई भूमि वापस लेने लगे है।
विगत 11 अप्रैल 2016 को उप्र शासन द्वारा जारी भूमि बिल संशोधन अधिनियम से पूरे जनपद में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इससे एक तरफ भू स्वामियों की भूमि परती रहने से पैदावार बंद हो जाएगी। वहीं दूसरी तरफ भूमिहीन व्यक्ति जो दूसरों की भूमि बटाई तथा मालगुजारी पर जोतते-बोते है उनके मुंह का निवाला छीन जाएगा। जिससे उनके बाल- बच्चों के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी।
एक्ट के बारे में उहापोह की वजह से भूमिहीनों से जमीन वापस ली जा रही है। सशंकित भूमि स्वामी यह कह रहे है कि भले ही हमारी भूमि परती रह जाए, लेकिन हम अपनी जमीन किसी को बटाई तथा मालगुजारी पर नहीं देंगे। जिससे लोगों में पैदवार बंद होने की डर व्याप्त है। जनता के बीच में फैली भ्रम की स्थिति को दूर नहीं की गई तो आने वाला समय गुरबत में जीने वालों के लिए काफी खतरनाक साबित होगा।