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गंगा और सरयू के तटों पर दी गई पितरों को विदाई

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पितृ विसर्जन के अवसर पर अपने पितृ को तर्पण के लिए पिंड दान करते लोग। - फोटो : BALLIA
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बलिया। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में होने वाले श्राद्ध पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ संपन्न हुए। रविवार को पितृ विसर्जनी अमावस्या पर गंगा और सरयू तट पर श्राद्ध व तर्पण कराए गए। लोगों ने अज्ञात तिथि के कारण छूटे श्राद्ध कराकर पितरों का आशीर्वाद लिया।
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आश्विन मास के सोलह श्राद्धों में पितृ विजर्सन अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। जिस पितर के वंशज को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, वह पितृ विसर्जन अमावस्या को उनका श्राद्ध कर्म करता है। अमावस्या को लोग अपने गुरु, चाचा, ताऊ सहित किसी भी रिश्तेदार या प्रियजन का श्राद्ध कराते हैं। रविवार को भी इसी तरह के ज्ञात व अज्ञात पितरों का श्राद्ध करवाने के लिए जनपद के गंगा और सरयू तट पर लोग उमड़े। उन्होंने पावन जल से तर्पण व श्राद्ध क पितरों को पिंडदान किया। उन्होंने पितरों से अपने वंशजों पर कृपा बनाए रखने का आशीर्वाद लिया। पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म कर उनको विदा करने के लिए सरयू नदी के बेल्थराबाजार घाट पर रविवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान लोगों ने नदी में स्नान करने के बाद दान पुण्य कर अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। बाबा अभिराम वैदिक आश्रम आत्म सुधार ज्योतिष अनुसंधान केंद्र होलपुर में पंडित मिथिलेश पांडेय ने पितरों का विधि विधान पूर्वक तर्पण कराया। इस दौरान नगर एवं क्षेत्र में सुबह से ही सैलून की दुकानों पर लोगों की लाइन लगी रही। पंडित पांडेय ने बताया कि पितृपक्ष में 15 दिनों तक पितरों को जल, श्राद्ध व तर्पण कर उन्हें संतुष्ट किया जाता है। पितृ विसर्जन के दिन पितृ लोक से आए हुए पितरों की विदाई होती है।
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