बैरिया। वर्ष 2002 में काम के बदले अनाज योजना के तहत हुए बहुचर्चित अनाज घोटाले में सोमवार को बयान दर्ज किए गए। बीस वर्ष पुराने कागजात के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने तत्कालीन कोटेदारों, ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत अधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी को तलब किया है।
सोमवार को बैरिया थाना परिसर में कतिपय संबंधित कोटेदारों, प्रधानों तथा ग्राम पंचायत अधिकारियों ने टीम को अपना बयान दिया।
मामले में जिला पंचायत तथा क्षेत्र पंचायत स्तर की तफ्तीश हो चुकी है। ग्राम पंचायत स्तर के हुए घोटाले के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के अधिकारी बैरिया पहुंचे हैं।
बैरिया विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों के कुल 120 प्रधान, सचिव, पदाधिकारियों पर घोटाले का मुकदमा वर्ष 2006 में सीबीसीआईडी द्वारा दर्ज कराने के बाद इसकी जांच आर्थिक अपराध संगठन को सौंप गई थी। सोमवार को जांच टीम जब बैरिया थाने में बयान लेने के लिए संबंधितों को तलब किया तो हड़कंप मच गया।
कुछ लोग ने जांच अधिकारी को बताया कि उनके पास 20 साल पुराने कागजात मौजूद नहीं है, तो कुछ ने कहा कि मैंने उठान ही नहीं किया। कुछ कागजात आर्थिक अपराध संगठन के पास जमा भी किए। संदर्भ में आर्थिक अपराध संगठन के जांच अधिकारी निरीक्षक सुनील वर्मा ने बताया कि 2002 में काम के बदले अनाज योजना में प्रति मजदूर को पांच किलो चावल और 23 रुपये नकद भुगतान होना था।
इसमें करोड़ों का घालमेल किए जाने पर एफआईआर दर्ज है, जिसकी जांच हो रही है। इसमें कोटेदार ही आरोपी नहीं हैं, बल्कि तत्कालीन डीपीआरओ और मुख्य विकास अधिकारी भी आरोपी बनाए गए हैं। जांच अधिकारी सुनील वर्मा ने बताया कि हमारे बुलावे पर जो लोग नहीं आ रहे हैं। उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजकर वाराणसी कार्यालय पर बुलाया जाएगा।