बलिया। सुगम यातायात के लिए कभी अलग पहचान रखने वाला जिला मुख्यालय अब अतिक्रमण से अभिशप्त है। इस शहर का नक्शा इस कदर बना है कि किसी भी गली से गुजर कर चौक तक पहुंचा जा सकता है लेकिन अब कई गलियां अतिक्रमण से सिमट गई है या बंद हो गई हैं। यही वजह है कि आए दिन शहर में जाम लगता है और लोग परेशान होते हैं। कई बार जाम से निजात के लिए योजना बनी लेकिन इस समस्या से निजात नहीं मिल सकी।
बलिया शहर को बसाने के लिए लंदन से दो इंजीनियर जापलिन और ओक्डेन आए थे। इन दोनों इंजीनियरों ने बाढ़ में पूरी तरह समाप्त हो चुके बलिया शहर को फिर से बसाया गया। दोनों इंजीनियरों ने इस शहर का जो नक्शा बनाया था, वह ऐसा था कि इस शहर में किसी को भी कहीं भी छोड़ दो वह हर तरफ से घूमकर अंतत: छह रास्तों को जोड़ने वाले चौक में ही पहुंच जाएगा। अब वही शहर अतिक्रमण व अवैध कब्जे के कारण इस हाल में पहुंच गया है कि इसकी लगभग सभी गलियां नक्शे से गायब हो गई हैं। अब स्टेशन कचहरी रोड से विशुनीपुर जाने वाली गली की चौड़ाई से आधी भी नहीं रह गई है। सहतवार कोठी के पीछे स्थित गली एक तरफ से पूरी तरह बंद हो चुकी है। गुरुद्वारा के पीछे स्थित इस गली पर सालों पहले से लगभग कब्जा की स्थिति है और इधर से अब कोई नहीं जाता है। कुछ स्थानों पर जेनरेटर का कब्जा है तो शुरूआत में ही एक बाइक सर्विस सेंटर का कब्जा है और वहां दिनभर रोड पर ही गाड़ियां धोई जाती हैं। यदि गलियों से अतिक्रमण हटाने के साथ ही बंद गलियों को खोल दिया जाए तो जाम की समस्या से मुक्ति मिल सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता व साहित्यकार शिव कुमार कौशिकेय बताते हैं कि गंगा की बाढ़ में पूरा शहर नक्शे से गायब हो गया था। इसके बाद अंग्रेजी शासन के सामने शहर को फिर से बसाने की चुनौती सामने आई तो यहां के तत्कालीन कलक्टर ने इसकी सूचना लंदन भेजी। तब लंदन से दो इंजीनियर भेजे गए, जिनकी देखरेख में पूरा शहर बसाया गया।
गलियां ऐसी थी कि ट्रक घुस जाए
शहर को बसाते समय पुराने जमाने के अंग्रेज इंजीनियरों ने भी कितनी दूरदर्शिता दिखाई थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उस समय गलियों के नाम पर जो जगह छोड़ी गई थी, उसकी चौड़ाई इतनी थी कि उनमें भी आप आसानी से ट्रकों पर सामान लादकर ले जा सकते थे। तब लगभग चार किलोमीटर के एरिया में बसाए गए इस शहर में कोई भी ऐसी गली या सड़क नहीं थी जिसपर जाम लगने की नौबत आए। आज भी यदि उन सभी गलियों को पहले की दशा में ला दिया जाए तो मुख्य सड़क पर इतना लोड ही नहीं रह जाएगा कि जाम की स्थिति हो। कारण कि जाम लगते ही लोग गलियों का रास्ता अपनाकर गंतव्य तक पहुंच जाएंगे।
इंजीनियरों के नाम पर हैं दो पुलिस चौकियां व मोहल्ले
लंदन से आकर शहर का नक्शा तैयार करने और अपनी देखरेख में बसाने वाले इन इंजीनियरों से तब के अंग्रेज अधिकारी इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने दोनों के नाम पर दो मोहल्लों के नाम रख दिए जो आज भी हैं। उन मोहल्लों में स्थापित होने वाली जापलिनगंज पुलिस चौकी और ओक्डेनगंज पुलिस चौकी का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया है।
कोट
ईओ से शहर का नक्शा मंगवा कर जांच कराई जाएगी। नक्शे के आधार पर गलियों की वर्तमान स्थिति देखकर अतिक्रमण हटाया जाएगा। अभी हाल ही में ओवरब्रिज के नीचे बड़ी कार्रवाई करते हुए थोक सब्जी मंडी को परिखरा स्थित मंडी में शिफ्ट भी कराया गया है।-बृजकिशोर दुबे, सिटी मजिस्ट्रेट।