विद्युत वितरण खंड द्वितीय कार्यालय पर विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के बैनर तले केंद्रीय कमेटी के आह्वान पर कर्मचारियों ने 17 सूत्री मांगों के समर्थन में गुरुवार को एक दिवसीय उपवास रखा। वक्ताओं ने कहा कि सरकार विद्युत कर्मचारियों के साथ अन्याय करते हुए सुविधाएं देने में कोताही बरत रही है।
सभा को संबोधित करते हुए समिति के जिला संयोजक वीर बहादुर सिंह ने कहा कि नौकरशाह, राजनीतिक तथा कारपोरेट के कुत्सित सहयोग से 14 जनवरी 2000 को ऊर्जा विभाग पुनर्गठन के नाम पर खेल किया गया।
तत्कालीन राज्य विद्युत परिषद के कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध किया लेकिन आज तक सरकार द्वारा किसी समझौते का पालन नहीं किया गया। 19 वर्षो में तीन पदोन्नति के वेतनमान की जगह अगली पे ग्रेड एवं एसीपी की व्यवस्था दी जा रही है। टाइम स्केल और पदोन्नति पर मिलने वाली वेतन वृद्धि रोक दी गई है।
कहा कि मजदूरों के दुर्घटना के समय विभाग के अधिकारी उन्हें पहचानने से इंकार कर देते हैं। जबकि एक संविदा कर्मचारी अपना जी जान लगाकर 24 घंटे कार्य करता है। चेताया कि एक दिवसीय उपवास के बाद भी अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं तो छह नवंबर से संघर्ष समिति के एलान द्वारा किए गए आंदोलन को शुरू किया जाएगा।
इस मौके पर सुनील सिंह, दीनानाथ मिश्र, अरुण सिंह, सत्येंद्र कुमार, विजय शंकर पांडेय, सहदेव चौबे, सुनील सिंह, सुधीर सिंह, अजित प्रताप सिंह, फणींद्र सिंह, दिनेश सिंह, परशुराम वर्मा, आलोक कुमार, विजय शंकर आदि ने विचार रखा। संचालन कौशल कुमार पांडेय ने किया।