लालगंज क्षेत्र के बीएसटी बंधे पर लगा स्ट्रीट लाइट।
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बलिया। जिले में मुफ्त की बिजली से गांव तो जगमग हो रहे हैं, लेकिन इसके चलते बिजली विभाग को भारी घाटा हो रहा है। ग्राम प्रधानों ने 2016 से पथ प्रकाश के नाम पर गांव के सार्वजनिक स्थानों, सड़कों पर स्ट्रीट लाइट तो लगवा दी लेकिन इसके लिए न तो बिजली का कनेक्शन लिया गया और न ही इस मद में एक रुपये का भुगतान किया गया है। ऐसे में बिजली विभाग को हर वर्ष करोड़ों की चपत लग रही है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जनवरी 2016 में पंचायतों की खुली बैठकें हुईं। इसमें पंचायतों ने 14वें वित्त के मद से पथ प्रकाश व्यवस्था के तहत प्रस्ताव पास कर हर गांव में लगभग 10 से 50 स्ट्रीट लाइटें लगवाईं। बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन स्ट्रीट लाइटों पर एक ग्राम पंचायत में एक दिन में लगभग 10 यूनिट बिजली की खपत हो रही है। इसका बिल लगभग दो सौ रुपये प्रतिदिन और छह हजार रुपये प्रतिमाह हुआ। जिले की 948 ग्राम पंचायतों की बात करें तो कुल मिलाकर लगभग 56 लाख 88 हजार रुपये प्रतिमाह का घाटा बिजली विभाग को उठाना पड़ रहा है। प्रतिवर्ष यह धनराशि छह करोड़ 82 लाख 56 हजार होती है। बिजली विभाग का कहना है कि कोरोना काल शुरू होने से ठीक पहले विभाग की ओर से डीपीआरओ को इस संबंध में पत्र भेजा गया था। इसके बाद लॉकडाउन हो जाने के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया।