बलिया। बलिया ने हमेशा राजनीति को दिशा दी है। आजादी की लड़ाई में भी जनपद अग्रणी भूमिका निभाते हुए सबसे आगे रहे है। ऐसे में मतदान में अभी तक 60 फीसद का आंकड़ा पार न करना एक दाग सा लगता है। लोकतंत्र में ऐसी व्यवस्था दी गई जिसमें जनता को सर्वोपरि स्थान मिला है। जनता के हाथों में शासन एवं सत्ता को स्वेच्छा से चुनने की बेमिसाल ताकत है। दुनिया भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की दुहाई देती है।
जिले में आज को सात विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। इन सीटों पर कु ल 82 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर लगी है। इनमें मंत्री उपेंद्र तिवारी, आनंद स्वरूप शुक्ला के अलावा सपा से नारद राय, राम गोविंद चौधरी, जियाउद्दीन रिजवी, उमाशंकर सिंह जैसे नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। जिले में करीब 25 लाख मतदाता 2828 बूथों पर अपना फैसला ईवीएम में लॉक करेंगे। बलिया के गौरवशाली अतीत के बीच दुखद है कि मतदाता अपनी इस असीम ताकत का इस्तेमाल चुनाव में करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह गंभीर चिता का विषय है। निर्वाचन आयोग खुद इस दिशा में आगे आया है। स्विप कार्यक्रमों से मतदाताओं को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है। मीडिया की ओर से भी इसमें अपना सहयोग दिया जा रहा है। लोकतंत्र की मजबूती को बनाए रखने के लिए मतदान के प्रतिशत को अधिक से अधिक कैसे बढ़ाया जाए इसके लिए एक सामूहिक कोशिश की गई है। ऐसे में आपके सामने बृहस्पतिवार को इस कोशिश को अंजाम तक पहुंचाने का शानदार मौका है। आइए इस सपने को साकार करें और लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करें।