तहसील प्रशासन की कारगुजारी से दो वर्ष पहले गुजरा व्यक्ति भी 3000 रुपये महीना कमा रहा है। एक मामला बलिया तहसील में प्रकाश में आया है।
तहसील बलिया अंतर्गत चितबड़ागांव थाने के जवाहर नगर मुहल्ला निवासी कुमारी ज्योति सिंह के आवेदन पर दिनांक 12 नवंबर 2013 को उपजिलाधिकारी कार्यालय जारी किए गए निवास प्रमाण पत्र में पिता का नाम स्व. आश नारायण सिंह है, यह बिल्कुल सही है। लेकिन कुमारी ज्योति सिंह द्वारा जब आय प्रमाण पत्र का आवदेन दिया गया तो तहसीलदार कार्यालय से जारी आय प्रमाणपत्र में पहले स्व. आश नारायण सिंह की जगह श्री आश नारायण सिंह अंकित किया गया है।
इतना ही नहीं आवेदक ज्योति सिंह के स्व. पिता की आय क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा तीन हजार रुपये बताई गई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि वर्ष 2013 में जो व्यक्ति गोलोकवासी हो चुका है वह 2015 में कमाने कैसे लगा। इस गलती से आवेदन करने वाली ज्योति और उनका परिवार भी दुखी है। इस संबंध में ज्योति सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन की ऐसी लापरवाही व्यवस्था पर सवालिया निशान है।
यह एक छोटी सी चूक है। कभी-कभार कंप्यूटर से ऐसी गलतियां हो जाती हैं। आवेदक आकर फिर से आवेदन करें। श्री हटाकर स्व. कर दिया जाएगा।
-संदीप त्रिपाठी, नायब तहसीलदार बलिया