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लॉकडाउन की वजह से सवा माह से बलिया में फंसी कोलकाता के हावड़ा से आई बरात, पूरी बारात दूल्हे के रिश्तेदार के यहां है रुकी

Wed, 29 Apr 2020 11:16 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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दूल्हे मियां और उनकी बरात में शामिल 23 लोग सवा माह से लॉकडाउन में फंसे हुए हैं। लड़की के पिता की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह इतने लंबे समय तक बरातियों का खर्च उठा सकता, इसलिए पूरी बरात दूल्हे के एक रिश्तेदार के यहां रुकी है। दुल्हन को विदाई के बाद मायके भेज दिया गया है। पहले इन्हें लगा था कि लॉकडाउन खुलने के बाद इनकी वापसी हो जाएगी, लेकिन अब इनकी समस्या बढ़ती जा रही है।

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ऐसे में बरात में शामिल लोगों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि संभव हो तो उनकी वापसी की व्यवस्था की जाए। बरात 21 मार्च को हावड़ा से बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र के डेहरी गांव में आई थी। बरात में शामिल सभी लोग इस समय चितबड़ागांव के हाता मोहल्ला में दूल्हे के रिश्तेदार के यहां मौजूद हैं।

पश्चिम बंगाल के हाबड़ा के जीटी रोड शिवपुर निवासी मु. मुस्तफा अंसारी के पुत्र एखलाक अहमद अंसारी की बरात 21 मार्च को रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के डेहरी निवासी रेयाज अहमद के यहां आई थी। बरात में दूल्हा समेत कुल 23 लोग शामिल थे। रेयाज की पुत्री अफ्साना खातून और एखलाक का निकाह हुआ।
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इसी बीच कोरोना वायरस को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर 22 मार्च को देश में जनता कर्फ्यू लगा। इन लोगों ने वापसी का टिकट 24 मार्च को कराया था। अचानक लॉकडाउन होने से भी ट्रेनें निरस्त हो गईं और ये लोग यहीं फंस गए।

अब लड़की के पिता की समस्या ये थी कि वह इतने लंबे समय तक सभी लोगों का खर्च वहन नहीं कर सकता था तो उसकी पीड़ा को समझते हुए बरात में शामिल सभी लोग दुल्हन की विदाई कराकर चितबड़ागांव हाता मोहल्ला में आ गए। यहां के महमूद दूल्हे के रिश्तेदार हैं।

बरातियों को उम्मीद थी कि 21 दिन के बाद लॉकडाउन हटेगा तो ये लोग वापस लौट जाएंगे, लेकिन तभी 19 दिन के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया। लगातार बढ़ रहे लॉकडाउन को देखते हुए लड़की को मायके भेज दिया गया है और बरात यहीं फंसी हुई है।

अमर उजाला पढ़ा तो जागी उम्मीद की किरण

दूल्हे एखलाक अहमद अंसारी ने बताया कि बीते 27 अप्रैल को अमर उजाला के प्रथम पेज पर छपी एक खबर पढ़ने के बाद उसके मन में भी उम्मीद की किरण जग गई है। खबर अलीगढ़ जिले की थी। खबर के अनुसार बरात के फंसे होने की खबर अमर उजाला में पढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया और बरात की विदाई के लिए विशेष अनुमति प्रदान की थी। अब एखलाक ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन की ओर से उसे भी अनुमति पत्र मिल जाए तो बरात की विदाई संभव हो जाती।

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