सरकार द्वारा आनलाइन दवा व्यापार (ई-फार्मेसी) और फार्मासिस्ट की अनिवार्यता के विरोध में बुधवार को नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की दूकानें पूरी तरह से बंद रहीं। इस दौरान दवा कारोबारियों ने बलिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार सिंह के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम खेमपाल सिंह को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही विशुनीपुर स्थित दवामंडी में एक सभा का आयोजन किया।
सभा को संबोधित करते हुए बीसीडीए के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार सिंह ने कहा कि सरकार आनलाइन दवा मार्केटिंग और फार्मासिस्ट की अनिवार्यता की बात करती है, लेकिन भारत जैसे देश में आनलाइन मार्केटिंग संभव नहीं है। यदि सरकार जबर्दस्ती यह नियम थोपती है, तो इसका खामियाजा आम गरीब नागरिकों को भुगतान पड़ेगा।
कारण की आज भी गांव में रहने वाली करीब 70 फीसदी आबादी आनलाइन खरीददारी करना नहीं जानती। साथ ही इस नियम के लागू होने से सवा लाख दवा व्यापारियों एवं उनके परिवार का भविष्य अंधकार मय हो जाएगा। कहा कि इसी तरह दवा दूकानों पर फार्मासिस्ट की अनिवार्यता की बात पूरी तरह से गलत है।
अंग्रेजों के जमाने के इस नियम में ढील देने की जरूरत है। ताकि कारोबारियों का कोई भी फार्मासिस्ट के नाम पर शोषण न कर सके। अब हर दवा कारोबारी पढ़ा हुआ है, साथ ही दवा के रेपर पर ही माल्यूक्यूल लिखे होते हैं। ऐसे में दवा दूकानों पर फार्मासिस्ट को रखने की अनिवार्यता खत्म करनी चाहिए।
कहा कि ये नियम पूरी तरह से जनविरोधी है। जब तक उक्त कानून को समाप्त नहीं किया जाता दवा कारोबारियों का आंदोलन जारी रहेगा। यदि जरूरत पड़ी तो संगठन के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर अनिश्चित कालीन तक दवा की दूकानों को बंद किया जा सकता है।
इस मौके पर अनिल त्रिपाठी, मनोज श्रीवास्त, अशोक श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, राजेश सिंह, जनार्दन, राजकुमार, संजय, घनश्याम, अजीत, दीपक, बब्लू, प्रमोद, यशपाल, चंद्रशेखर, शुभम, प्रशांत, ईशान, वीरेंद्र, छोटेलाल, मुहम्मद करीमुल्लाह, गुड्डू भाई, नफीस, संजय, मुन्ना, सतीश, अविनाश, मुमताज, कुंवर, राजकिशोर आदि रहे।