स्वास्थ्य विभाग के गैरजनपद स्थानांतित हुए 46 लिपिक तबादले के एक माह बाद भी अपने पदों पर जमे हैं। मुुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से संबंद्ध इन बाबुओं को अभी तक रिलीव नहीं किया गया है। इसे लेकर महकमे में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जबकि सीएमओ की माने तो जैसे-जैसे गैर जनपद से लिपिक यहां आ रहे है, वैसे-वैसे इन्हें भी रिलीव किया जा रहा है।
मालूम हो कि मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल तथा जिला महिला चिकित्सालय में दो दशक से अधिक समय से बाबू अपना-अपना जुगाड़ लगाकर जमे हुए हैं। इसमें से शासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से सबद्ध 46 बाबुओं का स्थानांतरण एक माह पूर्व गैर जनपदों गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, चंदौली, बहराइच, गोंडा, हमीरपुर, पीलीभीत, बस्ती, इलाहाबाद, संत कबीरनगर, मैनपुरी, रायबरेली, इटावा, रामपुर, गोरखपुर, लखीमपुर खीरी पर किया गया था। उक्त बाबूओं का स्थानांतरण पत्र आते ही महकमे में हड़कंप मच गया। कई बाबू अपना स्थानांतरण रुकवाने के लिए लखनऊ एवं आजमगढ़ तक का चक्कर तक लगाने लगे। कुछ हद तक अपनी कोशिश में कामयाब भी हुए।
इस संबंध में सीएमओ डा. एसपी राय ने बताया कि शासन के निर्देश पर 46 लिपिकों का स्थानांतरण किया गया है। हालांकि अभी तक उन्हें रिलीव नहीं किया जा सका है, इसकी वजह यह है कि अभी तक उनकी जगह लेने के लिए अन्य जनपदों से कर्मी नहीं आए हैं। जैसे-जैसे गैर जनपद से लिपिक यहां आ रहे है, वैसे-वैसे इन्हें भी रिलीव किया जा रहा है। कहा कि अगर शासन से एक साथ रिलीव करने का आदेश मिलता है तो एक साथ रिलीव कर दिया जाएगा। चाहे अस्पताल चले या न चले।