बलिया। एमडीपी कालेज प्रतापगढ़ की ओर से सात एवं आठ जून को ‘इश्यू एंड चैलेंजेस ऑफ कोविड-19 विद् रेफेरेंस टू रिजनल डेवलपमेंट प्लानिंग स्ट्रेटजी’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय बेविनार का आयोजन किया गया। इसमें अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य भूगोलविद् एवं पर्यावरणविद् डॉ. गणेश कुमार पाठक को संसाधन व्यक्ति ( रिसोर्स पर्सन) के रूपमें आमंत्रित किया गया था। डॉ. पाठक ने अपना व्याख्यान ‘भारतीय संस्कृति में क्षेत्रीय नियोजन एवं कोविड-19 का अंतर्संबंध: पूर्वांचल (उ.प्र.) के परिप्रेक्ष्य मेंऽ प्रस्तुत किया। बेविनार में एएनएम पीजी कालेज दूबेछपरा, बलिया के असि. प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ओझा एवं कुंवर सिंह पीजी कॉलेज बलिया के असि. प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार चतुर्वेदी ने भी प्रतिभागी के रूप में सहभागिता निभाई।
पूर्वांचल के क्षेत्रीय विकास के संदर्भ में डॉ. पाठक ने बताया कि पूर्वांचल का क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनविहीन एवं उद्योग विहीन है। संसाधन के रूप में इस क्षेत्र के अधिकांश जिलों में मात्र मिट्टी एवं जल ही है। इसलिए यहां की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि पर जनसंख्या का दबाव अधिक है। इससे इस क्षेत्र का विकास कुंठित हो गया है। इस क्षेत्र के अधिकांश जिलों में वनावरण एक प्रतिशत से भी कम है, जिससे पर्यावरण की दृष्टि से भी यह असंतुलित क्षेत्र है।