जयप्रकाश नगर। गंगा के तट पर चार महीने कल्पवास करने से, एक हजार गायों को दान करने या सुमेरु पर्वत के बराबर सोना दान करने से जो फल प्राप्त होता है, वही फल प्राप्त करने के लिए मात्र भगवन्नाम का जप किया जाए तो मिल सकता है। यह बातें शनिवार को रामनगर में हरिकीर्तन के समापन पर पहुंचे स्वामी हरिहरा नंद महाराज ने प्रवचन के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि कलियुग के पृथ्वी पर मनुष्यों को तरह-तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कलियुग अभी प्रथम चरण में है। 36 हजार वर्ष के इस युग का अभी पांच हजार वर्ष खत्म हुआ है। अभी 31 हजार वर्ष और इस युग के हैं। इसमें और अधिक विपदाएं आएंगी। इन्हें कम करने के लिए भगवत नाम के शिवा दूसरा कोई उपाय नहीं है। इस युग के बारे में विचार करके ही रामचरित मानस की रचना हुई। जो भी व्यक्ति भगत नाम या रामचरित मानस का पाठ करेगा, उसका यह कलियुग कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा। हरिहरा उपाध्याय, केदारनाथ चौबे, ओमप्रकाश सिंह, मिथिलेश दुबे, शिवराज यादव, केदार उपाध्याय छोटू मिश्र मौजूद रहे।