दया छपरा। लॉकडाउन से सब्जी उत्पादक किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि लागत की बात तो दूर रही, खेतों से सब्जी की तुड़ाई की लागत भी नहीं निकल रही है।
क्षेत्र के सब्जी उत्पादक किसान खेती के भरोसे ही बेटी की शादी समेत अन्य कार्य संपन्न करते हैं। इस दिनों बाजार में सब्जी का उचित भाव नहीं मिल रहा है। इस सीजन में खीरा, सतपुतिया, नेनुआ, भिंडी दो से तीन रुपये किलो तो लौकी 10 रुपये में पांच, करैली पांच रुपये, परवल आठ रुपये किलो तक किसान बेचने को मजबूर हैं। फिर भी कोई खरीदार नहीं है। दयाछपरा के किसान राजेंद्र वर्मा का कहना है कि सब्जियों के बाहर नहीं जाने के कारण भाव नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने बताया कि ग्रामीण इलाकों बिकने से जो सब्जियां बच जाती हैं उसे मवेशियों को खिलाना पड़ता है। दीनानाथ वर्मा ने कहा कि अब सब्जी का आलम यह है कि पड़ोसियों को भी देना चाहे तो वो भी लेने से इंकार कर देते हैं।