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Ballia News: 12 करोड़ खर्च, फिर भी 21 अंत्येष्टि स्थल अधूरे

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पंदह। ग्रामीण क्षेत्रों में सम्मानजनक अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई अंत्येष्टि स्थल निर्माण योजना जिले में प्रशासनिक शिथिलता और निगरानी नहीं करने से लापरवाही भेंट चढ़ती नजर आ रही है। बीते तीन वित्तीय वर्षों में 49 अंत्येष्टि स्थलों के निर्माण पर 12 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च के बाद भी 21 अंत्येष्टि स्थल अधूरे पड़े हैं। इनमें वित्तीय वर्ष 2024-25 के 11 और 2025-26 के सभी 10 निर्माण कार्य शामिल हैं।
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प्रत्येक अंत्येष्टि स्थल के निर्माण पर औसतन 24.50 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इस हिसाब से करीब 12 करोड़ 50 लाख से योजना जमीन पर उतारी गई, मगर ग्रामीणों को इसका पूरा लाभ अब तक नहीं मिल सका। वित्तीय वर्ष 2023-24 इस योजना के लिहाज से सबसे सफल रहा। इस दौरान जिले के 11 विकासखंडों की 20 ग्राम पंचायतों में अंत्येष्टि स्थल स्वीकृत किए गए और सभी 20 निर्माण कार्य पूरे कर लिए गए।
इस पर करीब 4.90 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में 11 ब्लॉकों की 19 ग्राम पंचायतों में लगभग 4.66 करोड़ की लागत से अंत्येष्टि स्थल बनाने थे। पंचायतों ने समय से कार्य शुरू तो कराया, लेकिन रफ्तार इतनी धीमी रही कि अब तक सिर्फ 8 स्थल ही पूरे हो सके हैं, जबकि 11 आज भी अधूरे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मनियर ब्लॉक के बड़सरी जागीर में निर्माण कार्य महज नींव तक सीमित है। हनुमानगंज के बसंतपुर में अंत्येष्टि स्थल प्लिंथ लेवल से आगे नहीं बढ़ सका, जबकि बेरुआरबारी ब्लॉक के मैरीटार में तो अब तक निर्माण शुरू ही नहीं हुआ है।
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2025-26 में एक भी कार्य पूरा नहीं

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 6 विकासखंडों की 10 ग्राम पंचायतों में अंत्येष्टि स्थल स्वीकृत किए गए, जिनके लिए करीब 2.45 करोड़ रुपये बजट दिया गया। लेकिन एक भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। इनमें से 6 स्थल नींव स्तर पर और 4 प्लिंथ स्तर से आगे नहीं बढ़ पाए हैं। अधूरे 21 अंत्येष्टि स्थलों की स्थिति भी अलग-अलग स्तर पर अटकी हुई है। 2024-25 के अधूरे स्थलों में 5 स्थानों पर छत का काम अधूरा है तो 3 स्थल प्लास्टर स्तर पर, 1 स्थल प्लिंथ स्तर पर अटका पड़ा है। जबकि 1 पंचायत में कार्य शुरू ही नहीं हुआ। वर्तमान सत्र में निर्माणाधीन 10 स्थलों में से 6 का कार्य नींव स्तर तक पूरा हो पाया है जबकि 4 प्लिंथ स्तर पर अटके हैं।
निगरानी तंत्र पर उठ रहे सवाल

अंत्येष्टि स्थल निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई और जिला स्तर पर अनुश्रवण समिति का गठन भी किया गया, लेकिन 2023-24 के बाद निगरानी तंत्र पूरी तरह ढीला पड़ता दिख रहा है। नतीजा यह है कि कहीं डेढ़ साल से निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो कहीं बुनियाद से आगे काम ही नहीं बढ़ पाया।
बीते तीन वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों एवं उनकी प्रगति की विस्तृत समीक्षा के लिए संबंधित सचिवों तथा एडीओ पंचायत को पत्र जारी कर दिया गया है। अधूरे कार्यों की जांच की जा रही है। जहां भी लापरवाही या तकनीकी अड़चनें आएंगी, उनका तत्काल समाधान करते हुए निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाएगा। - अविनाश कुमार श्रीवास्तव, जिला पंचायत राज अधिकारी, बलिया
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