राजस्व विभाग के अफसरों की लापरवाही से ई-डिस्ट्रक्ट ध्वस्त हो गई है। खासकर आय प्रमाण पत्र के नाम पर लूट मची है और मनमाने तरीके से आवेदनों को निरस्त कर दिया जाता है। बीते माह में केवल सदर तहसील में ही 360 आवेदनों को निरस्त किया गया है। शासन की ओर से ई-डिस्ट्रिक्ट के तहत आय, जाति व निवास प्रमाण ऑनलाइन जारी करने का प्रावधान किया गया है। जनसेवा केन्द्रों से किए गए ऑनलाइन आवेदनों को जांच के लिए ऑनलाइन ही लेखपालों के पोर्टल पर भेजा जाता है और जांच के बाद निवास प्रमाण पत्र एसडीएम तथा आय व जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर से जारी होते हैं। लेकिन यह सेवा पूरी तरह बिचौलिए के चंगुल में फंस कर रह गई है। आलम यह है कि तहसील कर्मियों के यहां सेटिंग नहीं होने पर आवेदनों को कई दिनों तक लटकाने व निरस्त करने का काम किया जाता है।
आवेदनों को जहां गैर क्षेत्र के लेखपाल के यहां भेज दिया जाता है वहीं कई लेखपालों की ओर से क्षेत्र का आवेदन होने के बावजूद बिना कार्रवाई के ही वापस कर दिया जाता है या फिर बहाना बनाकर कर निरस्त कर दिया जाता है। खासकर यह खेल सदर तहसील में बड़े पैमाने पर किया जाता है। बताया जाता है कि बीते महीने में सदर तहसील से कुल 360 आवेदनों को निरस्त किया गया है जिसमें अधिकांश आय प्रमाण पत्र के आवेदन हैं। बतौर उदाहरण 11 सितंबर को किए गए आय प्रमाण पत्र के सोहांव निवासिनी धनकेशरी के आवेदन संख्या 171930010195234, खैरुन के 195322, कलावती 195329 को 20 दिनों बाद साक्ष्य अस्पष्ठ होने के आधार निरस्त कर दिया गया जबकि इसी साक्ष्य पर इनको तहसीलदार की ओर से जाति प्रमाण पत्र जारी किया गया। अब सवाल उठता है कि मजदूरी करने वाले किस तरह का साक्ष्य दें।