अब गर्मी अपने चरम पर पहुंचने लगी है। आसमान से आग बरसने लगी है। झुलसाने वाली धूप से बचने के लिए लोग पूरे दिन घरों में ही रह रहे हैं। बहुत जरूरी होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं।
सुबह आठ बजे ही धूप तिखी हो जा रही है। सबसे अधिक परेशानी अब स्कूल जाने वाले बच्चों को हो रही है। कड़ धूप में वापस घर आना पड़ता है। स्कूल वाहन के छत भी दोपहर में तवे की तरह तपने लग रहे हैं।
दिन चढ़ने के साथ पारा ऊपर जाने लगा है। गत दिनों मौसम खराब होने से लग रहा था कि गर्मी का पता नहीं चल पाएगा लेकिन जैसे-जैसे मौसम सुधरा, भगवान सूर्य तेवर दिखाने लगे।
सुबह आठ बजते-बजते धूप तीखी हो जा रही है। दस बजते-बजते सड़कों पर इक्कादुक्का लोग ही नजर आते हैं। लोग बहुत जरूरी होने पर ही दोपहर में घरों या दफ्तरों से निकल रहे हैं। गर्मी से बचने के लिए लोग छतरी, गमछे, टोपी का सहारा ले रहे हैं।
पारा चढ़ते ही फलों और शरबत का बाजार भी चमक गया है। चट्टी चौराहों पर मौसमी फलों जैसे खीरा, तरबूज आदि की बिक्री तेज हो गई है। शीतल पेय पदार्थों की बिक्री भी तेज हो गई है। सतुई लस्सी, दही की लस्सी, बेल का शरबत आदि देसी पेय पदार्थों की मांग बढ़ गई है। वहीं प्रमुख कंपनियों के शीतल पेय की मांग भी तेज हो गई है।