बड़ी चर्खी तथा दूकान को तैयार करते गैर जनपदों के दूकानदार।
महर्षि भृगु की तपोस्थली और उनके शिष्य दर्दर मुनि के नाम पर कार्तिका मास के पूर्णिमा तिथि से लगने वाले ददरी मेला के लिए गैर जनपदों से आई दूकानें सजने लगी हैं। वहीं मेले में झूला, चर्खी, ब्रेकडांस आदि को लगाकर पूर्णिमा तक तैयार करने में जी जान से संचालक तथा उनके मजदूर जुटे हुए हैं।
हर साल की भांति इस बार ददरी मेला के मीना बाजार में जिले के साथ ही गैर जनपदों एवं प्रांतों के दूकान आ चुके है। अपनी अलग-अलग दूकाने आवंटित कराने के बाद उन पर दूकान सजाने शुरू कर दिए है। मेले में लगने वाले बड़े झूले तथा चर्खी का कार्य अंतिम दौर चल रहा है। वहीं मीना बाजार में दूकान सजाने का कार्य भी जोरशोर से चल रहा है। मेला प्रशासन दूकानों के लिए जमीन का आवंटन कर दिया है। इस मेले में गैर जनपदों के साथ गैर प्रांतों की दूकाने हर साल आती है।
इस बार खजला, चूड़ी, स्वेटर, क्राकरी सहित अन्य वस्तुओं की दूकाने आ चुकी है। दूकानों को सजाने वाले कारीगर अभी से कार्य शुरू कर चुके है। लखनऊ, कानपुर, फैजाबाद, कोलकाता, झारखंड, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, लुधियाना सहित अन्य जगहों से दूकानदार अपने दूकान लेकर आ चुके है। वो अपनी को अंतिम रूप देने के लिए दिन रात मेहनत कर सजाने का कार्य कर रहे है।