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खाद-बीज बिना कैसे हो खेती

Fri, 18 Nov 2016 11:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
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नोटबंदी के चलते लोगों की परेशानी कम होते नहीं दिख रही है। टीडी काॅलेज चौराहा स्थित एटीएम पर लगी लोगों की भीड़ । - फोटो : ballia
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गेहूं, सरसों, चना, मटर की बुआई का समय एक से 20 नवंबर तक माना जाता है। किसान बुआई की तैयारी कर रहे थे कि पांच सौ और हजार के नोट बंद हो गए। किसान बैंक से पैसे नहीं निकाल पा रहे हैं। दूकानदार उधार खाद-बीज देने से मना कर रहे हैं।
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तैयार हुई फसल खरीदने के बाद आढ़तिया भी पैसे नहीं दे पा रहे हैं। इससे किसान फसल बेच कर खाद-बीज नहीं खरीद पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बैंक शाखा कम होने से भीड़ अधिक है। लाइन लगाने के बाद कैश खत्म होने पर किसानों को निराश ही लौटना पड़ रहा है। हालत यह है कि खेती के समय किसानों को बैंक में समय बर्बाद करना पड़ रहा है।

नरहीं के किसान विजय राय की मानें तो उनको आलू की बुआई करनी है। खेत की जुताई तो हो गई है। लेकिन पैसे के अभाव के कारण आलू की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं किसान महेश्वर गुप्त का कहना है कि खाद वह 20 बोरी खाद के लिए जब दूकान गया तो वहां पुराने नोट लेने से इंकार कर दिया। वहीं नए नोट के चक्कर में आज पांच दिनों से बैंकों में जा-जाकर रोज खाली हाथ लौट रहे हैं।
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इससे इतर मजदूर तबके की बात करें तो पिछड़ा इलाका होने के कारण 70 प्रतिशत लोग दिहाड़ी मजदूर पर निर्भर है। इन्हें काम नहीं मिल रहा है। गड़वार निवासी मजदूर राकेश गोंड तथा संतोष गोंड का कहना है कि नोटबंदी के कारण हर जगह काम रुक गया है। जिसके कारण हम मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है।


ऐसे में हमारे सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। वहीं नगर के काजीपुरा मुहल्ला निवासी नौषाद ने बताया कि वह लोग तीन भाई। तीनों भाइयों का परिवार दिहाड़ी पर निर्भर है। काम न मिलने के कारण दिहाड़ी भी नहीं मिल पा रही है। जिससे परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है। 
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