नगर के शहीद पार्क चौक में मकर संक्रांति पर्व के लिए लाई, चिउड़ा आदि की खरीदारी करते लोग।संवाद
बलिया। तिल, गुड़, चूड़ा-दही खाने का पर्व खिचड़ी मनाने के लिए लोगों ने तैयारियां कर ली। बुधवार को देर रात तक लोगों ने खरीदारी की। घरों में महिलाओं ने भी विविध प्रकार के खाद्य सामग्री तैयार की। बाजार में दिन भर चहल पहल रही। लोगों ने अपने नाते रिश्तेदारों के यहां भी खिचड़ी भेजकर रस्म अदायगी की। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत लोगों ने मकर संक्रांति से पहले अपनी बहन, बुआ और अन्य रिश्तेदारों के यहां लाई-चूड़ा, नया चावल, वस्त्र व मिठाइयां भेजीं। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बुधवार को भगवान सूर्य का दर्शन होते ही आम जनमानस के चेहरे खिल उठे। बाजार में महिलाएं समेत पुरुष मकर संक्रांति पर्व मनाने के लिए चूड़ा लाई की दुकानों पर खरीदारी के लिए उमड़ पड़े। चिउड़ा 50 से 60 किग्रा, गजक 100 प्रति डब्बा, बदाम पट्टी 10 से 40 रुपये प्रति पीस, तिलवा 100 प्रति किग्रा, बाजरा का तिलवा 200 प्रति किग्रा बिक रहा है।
स्नान व दान का विशेष महत्व
कुंज बिहारी मिश्र के अनुसार सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में पहुंचने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान की परंपरा है। उनके अनुसार 14 जनवरी को रात्रि आठ बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसका पुण्य काल आठ घंटे पहले या 16 घंटे बाद तक माना जाता है। इस कारण लोग 14 जनवरी को मकर संक्रांति मना रहे है जबकि स्नान का महत्व सुबह होता है। इस कारण 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन गंगा या अन्य नदियों, सरोवरों में स्नान व दान का विशेष महत्व है।