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कोर्ट ने सीबी सीआईडी इंस्पेक्टर को भेजा जेल

Thu, 03 Sep 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बलिया
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 दो दशक पूर्व हत्या के एक मामले में सीबीसीआईडी वाराणसी की शाखा में तैनात इंस्पेक्टर संतोष द्विवेदी ने कोर्ट द्वारा गैर जमानती वारंट जारी किए जाने पर अपर जिला और सत्र न्यायाधीश की अदालत में गुरुवार को आत्मसमर्पण कर दिया।  कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया  तथा जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए नौ सितंबर की तारीख नियत की।
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सीबीसीआईडी वाराणसी में तैनात इंस्पेक्टर संतोष द्विवेदी 20 साल पहले गड़वार थाने पर एसओ के रूप में तैनात थे। उस दौरान थाना क्षेत्र के बुढ़ऊ कुरेजी निवासी देवेंद्र सिंह को घर से थाने लाकर बेरहमी से पीटा गया था जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी। आरोप है कि आनन-फानन में एसओ संतोष द्विवेदी ने देवेंद्र के बड़े भाई को बुलाकर उसका पोस्टमार्टम कराने के बाद जबरिया दाह संस्कार करवा दिया।

इस मामले में बड़े भाई वीरेंद्र सिंह ने तत्कालीन जिलाधिकारी हरिराम को प्रार्थना पत्र दिया था। डीएम के आदेश पर एसओ सहित पांच पुलिस कर्मियों पर मुकदमा पंजीकृत किया गया। पुलिस से न्याय न मिलते देख पीड़ित ने मानवाधिकार आयोग के पास गुहार लगाई। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप पर मामले की सीबीसीआईडी जांच कराने का आदेश दिया गया था। 
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सीबीसीआईडी ने तत्कालीन एसओ संतोष द्विवेदी सहित दस पुलिस कर्मियों के विरुद्ध आरोपपत्र प्रेषित किया। इस मामले में एसओ को छोड़ बाकी नौ आरोपियों ने जमानत करा ली थी। जबकि तत्कालीन एसओ ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर अपने विरुद्ध मामला नहीं बनाने की गुहार लगाई। उच्च न्यायालय के आदेश पर संबंधित कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एसओ का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।

वादी के पास साक्ष्य के लिए नोटिस जाने के बाद वादी वीरेंद्र सिंह ने अपने अधिवक्ता संजीव सिंह के माध्यम से पत्रावली का अवलोकन कराया तो ज्ञात हुआ कि अभियुक्त संतोष द्विवेदी इस मामले में बिना जमानत कराए ही आरोप तय करा लिया है। वादी ने प्रार्थनापत्र दिया तो कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अभियुक्त संतोष द्विवेदी को स्पष्टीकरण तथा व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया।

लेकिन आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अभियुक्त के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया। जिस पर गुरुवार को अभियुक्त ने अदालत में उक्त मुकदमे में जमानत के लिए आत्मसमर्पण किया। 
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