धरहरा गांव में दो दिन पहले तक हर ओर आम दिनों सा ही नजारा था। गांव के लोग अपने-अपने कार्य में मशगूल थे। लेकिन गुरुवार को शनिवार को जहरीली शराब पीने से हुई तीन लोगों की मौत ने वहां के आबो-हवा में जहर घोल दिया और गांव के हर कोने में रूदन-क्रंदन शुरू हो गया।
इसके पीछे की वजह जिला प्रशासन की लापरवाही तथा बेरोकटोक बिक रही अवैध शराब रही। उम्मीदवार भी मतदाताओं को जमकर दारू पिलाने और पैसा बांटने का काम कर रहे हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत का चुनाव बीत गया है। अब बारी है ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत सदस्य पद का। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
ऐसे में प्रत्याशियों द्वारा बाटी-चोखा और दारू का दौर चल रहा है। लेकिन प्रशासन ने जानकारी के बाद भी किसी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की। यदि पुलिस अचार संहिता लागू होने के साथ प्रत्याशियों द्वारा आयोजित बाटी-चोखा और दारू की पार्टी के विरुद्ध अभियान चलाया गया होता, तो शायद धरहरा की घटना टल सकती थी।
धरहरा में कुंदन प्रसाद गुप्ता (60), केशव बिंद (62) तथा रामगोविंद (58) की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया। अवैध दारू से मौत का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी क्षेत्र के बसंतपुर और मनियर क्षेत्र में मौत की घटनाएं हुई है।
विडंबना यह है कि जिला प्रशासन उसी समय अवैध शराब कारोबार के विरूद्ध कार्रवाई करता है, जब कोई बड़ा हादसा होता है। अन्यथा की स्थिति में शराब के अवैध कारोबार को देखकर भी कार्रवाई की औपचारिकता भर पूरा करता है।