होटल वैष्णवी में बदमाशों की गोली के शिकार हुए इंस्पेक्टर अनिल कुमार की मौत पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है। उनकी हत्या के बाद मुख्यमंत्री के साथ विभागीय मंत्री और उच्च अधिकारियों ने भी चुप्पी साध रखी है। यहां तक कि उनकी मौत पर किसी ने संवेदना तक नहीं जताई है। एक फौजी की मौत पर केंद्र सरकार के साथ ही यूपी सरकार भी अपनी तरफ लाखों रुपये के मुआवजे की घोषणा करती है तो फिर इंस्पेक्टर की हत्या के बाद उनके परिवार वालों के मुआवजे के लिए कोई आगे क्यों नहीं आ रहा है। इसे लेकर पुलिस कर्मियों में भी भारी आक्रोश है।
गोली के शिकार हुए कोतवाल अनिल कुमार की पेंशन और ग्रेच्युटी में उनका निलंबन पेंच फंसा सकता है। परिजनों को राहत देने के मामले में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी फिलहाल चुप्पी साध ली है। हालांकि एसपी का दावा है कि इंस्पेक्टर अनिल कुमार के निलंबन की जांच एएसपी पश्चिमी दिनेश सिंह कर रहे हैं। उनकी रिपोर्ट आते ही अनिल के विभागीय भुगतान के लिए फाइलें तेजी से निपटाई जाएंगी।
अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या का खुलासा न कर पाने के आरोप में कोतवाल रहे अनिल कुमार को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि वे बहाली के लिए प्रयासरत थे। उनका रास्ता भी करीब-करीब साफ हो गया था। मगर उसके पहले ही होटल में उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के फौरन बाद राहत के नाम पर अंतिम संस्कार के लिए अनिल के परिजनों को पांच हजार रुपये की धनराशि दी गई। उसके बाद विभाग के आलाअधिकारियों ने चुप्पी साध ली। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार आगे किसी भी प्रकार की मदद मिलने में दिक्कत आ सकती है। कोतवाल रहे इंस्पेक्टर अनिल कुमार की पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी निलंबन का ग्रहण लग सकता है। हालांकि फौरी तौर पर अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। एसपी सुनील कुमार के अनुसार मामले की जांच एएसपी पश्चिमी दिनेश कुमार को दी गई है। जांच रिपोर्ट के बाद तेजी से कार्रवाई होगी।