भूमि की पैमाइश के दौरान बुधवार को रामपुर बनहरा गांव में खूनी संघर्ष हो गया। इसमें पूर्व ग्राम प्रधान सहित दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ लोग घायल हो गए। इनमें दो लोगों को हालत गंभीर होने पर वाराणसी रेफर कर दिया गया। मारपीट के दौरान लाठी-डंडे, धारदार हथियार और यहां तक कि तमंचे का भी इस्तेमाल हुआ। मारपीट के बाद एक पक्ष ने दूसरे पक्ष से जुडे़ एक घर में आग लगा दी। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई है।
सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के रामपुर बनहरा गांव निवासी पूर्व प्रधान गणेश राय और चंदेश्वर राय के बीच काफी दिनों से भूमि का विवाद चल रहा है। बुधवार को नायब तहसीलदार आलोक कुमार के साथ कानूनगो और लेखपाल विवादित भूमि की पैमाइश कराने पहुंचे। अभी पैमाइश शुरू ही होने वाली थी कि दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। देखते ही देखते दोनों पक्षों में धारदार हथियार और लाठी-डंडे चलने लगे।
इसमें एक पक्ष के पूर्व प्रधान गणेश राय (70) और उनके समर्थक निर्मल राय (45) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गिरिजा किशोर राय (55), मंजय राय (36), राजेंद्र राय घायल हो गए। इसी क्रम में दूसरे पक्ष के सुनील राय (50) गोली लगने से और आशुतोष राय (32), विनय राय (40), आनंद राय (30) और चंदेश्वर राय (75) लाठी-डंडे और धारदार हथियार से घायल हो गए। सभी घायलों को सीएचसी सिकंदरपुर पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने मंजय राय को छोड़ अन्य को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। उधर, जिला अस्पताल से चंद्रेश्वर राय और आनंद को वाराणसी रेफर कर दिया गया।
घटना के कुछ देर बाद चंदेश्वर राय के घर के पास स्थित झोपड़ी में दूसरे पक्ष ने आग लगा दी। इसमें ट्रैक्टर, बाइक और सामान जलकर राख हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह के निर्देश पर कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के बाद गांव में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई है। समाचार लिखे जाने तक किसी भी पक्ष की तरफ से तहरीर नहीं दी गई थी।
रामपुर बनहरा में काफी पहले से ही पूर्व प्रधान गणेश राय और चंदेश्वर राय के बीच विवाद चल रहा था। अभी एक माह पूर्व ही दोनों पक्षों में जमीन को लेकर मारपीट हुई थी। उस समय दोनों पक्षों ने मुकदमा भी दर्ज कराया था। बावजूद इसके पता नहीं क्यों नायब तहसीलदार पुलिस को लिए बिना ही पैमाइश कराने पहुंच गए। लोगों का कहना था कि यदि नायब तहसीलदार पुलिस के साथ पैमाइश करने गए होते तो यह नौबत न आती।
खूनी संघर्ष के बाद मौके पर पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह और जिलाधिकारी मुरली मनोहर लाल भी पहुंचे थे। उन्होंने सिकंदरपुर के क्षेत्राधिकारी रामकृष्ण मिश्र और एसओ संजय द्विवेदी से घटना की पूरी जानकारी लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया। जब दोनों अधिकारी घायलों को देखने सीएचसी सिकंदरपुर पहुंचे तो वहां पूर्व प्रधान पक्ष के लोग डीएम और एसपी से एसओ को निलंबित करने की मांग करने लगे। एसपी ने मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया।