जमीन के विवाद में पुलिस के कार्रवाई न करने से नाराज देवरिया गांव के रामचंद्र ने परिवार समेत नगरा थाने में आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि पुलिस वालों ने उन्हें पहले ही हिरासत में ले लिया। पीडि़त परिवार ने जहां पुलिस और ग्राम प्रधान पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है वहीं पुलिस का कहना है कि रामचंद्र के आरोप बेबुनियाद हैं।
नगरा के देवरिया गांव में प्रधान गुलाब राम और रामचंद्र राम के बीच जमीन के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। रामचंद्र ने इस मामले में मुकदमा भी दायर किया है। इस बीच विवादित भूमि पर प्रधान पक्ष ने निर्माण कार्य शुरू करा दिया। रामचंद्र उसे रुकवाने के लिए नगरा थाने में गुहार लगाई। आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई के बजाय उन्हें डांटकर भगा दिया। उन्होंने फोन पर उच्चाधिकारियों से भी गुहार लगाई।
निर्माण कार्य न रुकने पर रविवार को एसडीम रसड़ा रामचंद्र और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर दिन में दो बजे आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। घोषित समय पर रामचंद्र अपनी मां, भाई, भतीजा और तीन पुत्रियों के साथ थाने पहुंच गए। वहां जब दलित परिवार ने मिट्टी का तेल उड़ेलकर आग लगाना चाहा, तभी पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। थाने में रामचंद्र चिल्ला-चिल्लाकर पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगा रहे थे।
उनका कहना था कि यदि पुलिस ने कार्रवाई की होती तो उन्हें यह कदम न उठाना पड़ना। उधर, थानाध्यक्ष का कहना है कि गांव में विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। पुलिस पर लगाए गए रामचंद्र के आरोप बेबुनियाद हैं।