बलिया। राजकीय आईटीआई द्वारा बच्चों से प्रयोगात्मक परीक्षा के नाम पर धन उगाही किए जाने तथा आज तक मुख्य परीक्षा केंद्र पर जॉब कोड जमा नहीं किए जाने के मामले में जांच कराने के लिए अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम से मिला। इस दौरान मांग की गई कि इस प्रकरण की जांच कराने के लिए कमेटी गठित की जाय।
जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में अधिवक्ता मनोज राय हंस ने मांग की कि पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी गोविंद राजू एनएस ने इस प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की थी। जिसमें तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट रामगोपाल सिंह तथा डीआईओएस रमेश कुमार सिंह ने जांच कर अपनी रिपोर्ट में दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की संस्तुति की थी। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कहा गया है कि बलिया राजकीय आईटीआई में पर्याप्त स्थान और उपकरण होने के बाद प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया। जबकि शहर से सटे कई आईटीआई स्कूल होने के बाद भी जिले के सुदूरवर्ती इलाके में 45 किमी दूर प्रयोगात्मक परीक्षा का केंद्र बनाया गया। प्रत्येक प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्र पर एक फीटर और एक इलेक्ट्रीशियन नियुक्त किया जाना चाहिए। लेकिन इस साल के होने वाले प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्र में ऐसा नहीं किया गया। जिले के दूर वाले स्कूलों में 12 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें भ्रष्टाचार करने के लिए पूरी छूट दे दी गई है। छात्रों से अवैध वसूली चल रहा है। जिले में कुल 14000 हजार छात्र परीक्षा दे रहे है। एक-एक छात्र से 25 सौ रुपये तक वसूले जा रहे है। इस मौके पर जिलाधिकारी से प्रतिनिधिमंडल ने एक-एक बात बताई। जिस पर जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने कहा जल्द ही टीम गठित कर प्रकरण की जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर रवीेंद्र कुमार वर्मा, देवनाथ पांडेय, अशोक वर्मा, विजयशंकर गुप्ता, सोनू गुप्त, देवेंद्र यादव, गोरख नाथ पांडेय, जयप्रकाश वर्मा, विवेकानंद पांडेय आदि मौजूद रहे।