घोघा। बांसडीह नगर पंचायत सहित ग्रामीण इलाकों के गांवो में अपात्र खाद्यान्न योजना का लाभ उठा रहे हैं। वहीं पात्रों को खाद्यान्न नहीं मिल रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा राशनकार्ड के सत्यापन कराकर अपात्रों को सूची से हटाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि पात्रों का राशन कार्ड नहीं बना है। नगर पंचायत सहित ग्रामीण इलाकों में ऐसे लोगों को राशन कार्ड मिला है। जिनकी वार्षिक आय दो लाख रुपये से भी अधिक है, जबकि उनके पास काफी अधिक कृषि योग्य भूमि है आलीशान पक्का मकान है। फिर भी वे खाद्यान्न उठा रहे हैं, बहुत से पात्र ऐसे हैं जो इस सुविधाओं से वंचित हैं। जिसको लेकर ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है। राशन कार्ड के सत्यापन में मानक का पालन नहीं किया जा रहा है सत्यापन के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। जबकि सच तो यह है कि अन्त्योदय व पात्र गृहस्थी की सूची में अधिकांश अपात्रों का नाम शामिल है ।